भाजपा की सरकार ने बस्तरवासियों के साथ छल किया – दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि डबल इंजन सरकार कॉर्पाेरेट परस्त है इनका फोकस केवल संसाधनों की लूट पर है, जंगल और खनिज संसाधन ही नहीं छत्तीसगढ़ के नदियों पर भी पूंजीपतियों की बुरी नजर लग गई है। बस्तर के नदी, नालों के पानी के सहारे अब तक करोड़ों टन लौह अयस्क ले जाया जा रहा है। किरन्दूल स्थित एनएमडीसी की खदानों से रोज़ाना औसतन 20 हज़ार टन लौह अयस्क चूर्ण स्लरी पाइप लाइन के जरिए अपने विशाखापटनम स्थित निजी स्टील प्लांट ले जाया जा रहा है। बस्तर की शबरी नदी और दंतेवाड़ा के मदाड़ी नाले के हज़ारों क्यूसेक पानी का उपयोग रोज़ाना इस परिवहन में किया जा रहा है। इस कंपनी के किरंदुल स्थित बेनिफिकेशन प्लांट से बस्तरवासियों को कोई लाभ तो नहीं मिला, लेकिन इस प्लांट से निकलने वाले लौह अयस्क के अपशिष्ट से दंतेवाड़ा जिले की हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर जरूर हो चुकी और नदी नाले प्रदूषित हो चुके हैं। नदी नालों के साथ ही शुद्ध पेयजल का भी दुरूपयोग हो रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के असंतुलित दोहन से बस्तर के लोगों को पर्यावरण का भयानक नुकसान हो रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सारे संसाधन हमारे, वन यहां के कांटे जा रहे हैं, खनिज और पानी यहां का, लेकिन प्लांट आंध्रप्रदेश में होने के कारण जीएसटी और केंद्रीय करों में राज्यांश का लाभ छत्तीसगढ़ को नहीं, आंध्र प्रदेश को? रोज़गार के अवसर भी आंध्रा के लोगों को उपलब्ध हो रहे हैं। पहले फेज़ में 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और दूसरे फेज़ में अतिरिक्त 35 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा। अर्थात इस प्लांट से कुल 55 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा, लेकिन इसमें छत्तीसगढ़ के युवाओं की हिस्सेदारी नहीं होगी। बस्तर के जिन गरीब आदिवासियों के जल, जंगल और ज़मीन के सहारे मोटा मुनाफा कमाने की आंध्रप्रदेश में तैयारी की जा रही है उन आदिवासियों के साथ हो रहे इतने बड़े धोखे पर भाजपा की सरकार मौन है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि डबल इंजन सरकार के संरक्षण में ही विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी जो अब तक केवल बस्तर के पानी और लोहे से अरबों रुपयों का मुनाफा कमा चुकी है, उसके पास बस्तरवासियों को देने के लिए कुछ भी नहीं है। कई बेरोज़गार नौजवानों ने परिवहन का काम मिलने की आस में ट्रकें खरीदीं, लेकिन उनके अपेक्षाओं पर पानी फेरकर शबरी नदी के जल का दुरूपयोग करके स्लरी पाईप से लौह अयस्क का परिवहन किया जा रहा है। भाजपा की सरकार ने बस्तर वासियों के साथ छल किया है। यदि प्लांट छत्तीसगढ़ में लगता तो हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता, सारे संसाधन हमारे हैं और लाभ अन्य प्रदेश के लोगों को मिलेगा। बस्तर वैसे ही जल संकट से गुजर रहा है। एक शबरी नदी ही बची है उस पर भी डबल इंजन की सरकार के संरक्षण में उद्योगपतियों की बुरी नजर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *