एनपीके खाद और पोटाश की कीमतों में वृद्धि, किसानों के हितों पर कुठाराघात – कांग्रेस

० यूरिया की बोरी में वजन और नाइट्रोजन की मात्रा में कटौती, सल्फर के अधिक मिलावट से होगा नुकसान

रायपुर। एनपीके खाद और पोटाश की कीमतों में वृद्धि को किसानों के साथ अन्याय बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एक तरफ सरकार विगत दो वर्षों से धान के एमएसपी में वृद्धि का लाभ किसानों को नहीं दे रही है, तो वहीं दूसरी ओर खाद की कीमतों में लगातार वृद्धि कर रही है। एनपीके की कीमत 1,720 रुपए प्रति बोरी से बढ़ाकर 1,900 रुपए और पोटाश की कीमत 1,500 से बढ़ाकर 1,800 रुपए प्रति बोरी कर दिया गया है, एनपीके की कीमत पिछले दो सालों में 430 रुपए प्रति बोरी बढ़ाया गया है, अर्थात 860 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हुआ है, इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है, उत्पादन लागत लगातार बढ़ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों से छल कर रही है। यूरिया खाद में नाइट्रोजन की मात्रा 46 प्रतिशत से घटाकर 37 प्रतिशत कर दिया गया है, और इसमें 17 प्रतिशत सल्फर की मिलावट की जा रही है। पहले प्रति बैग यूरिया में लगभग 23 किलोग्राम नाइट्रोजन मिलता था, अब घटकर यह मात्र 15 किलोग्राम रह गया है, इसका मतलब साफ है कि प्रति किलोग्राम नाइट्रोजन उर्वरक खरीदने के लिए किसानों को पहले की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। अधिक सल्फर की मात्रा अनाज, दलहन और तिलहन के फसलों के लिए नुकसानदेह होगा। 50 किलो की बोरी के स्थान पर 40 किलो वजन का बैग बनाया जा रहा है, अर्थात बोरी का वजन और उसमें नाइट्रोजन की मात्रा दोनों घटाने के साथ ही अनुपयोगी गुणवत्ताहीन नैनो यूरिया थोपने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। किसानों के हिस्से के सब्सिडी वाले यूरिया का दुरुपयोग सत्ता के संरक्षण में उद्योगपतियों की फैक्ट्रियों में हो रहा है। भाजपा सरकार की किसान विरोधी फैसलों से कृषि और किसानों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकारों की दुर्भावना के चलते किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और खेती करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। किसान विरोधी यह सरकार हर बजट में खाद सब्सिडी घटा रही है, जिसका सीधा असर कृषि लागत में दिख रहा है। वादा था किसानों की आय दुगुनी करने का, वह तो हुआ नहीं, उल्टा भाजपा की सरकार में कृषि की लागत 2014 की तुलना में 4 गुना अधिक हो गया। भाजपा की सरकार किसानों के हितों पर कुठाराघात कर रही है।

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