अपने रिटायरमेंट से एक दिन पहले प्राचार्य ने महिला भृत्य की नौकरी से किया खिलवाड़

0 सफाई का काम करने से इंकार करने की दी सजा 
0  रिटायरमेंट के बाद तीन माह का एक्सटेंशन मिला प्राचार्य को 
(अर्जुन झा) जगदलपुर। अगर कोई अधिकारी अपनी सेवनिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले ही ऎसी करतूत कर दे कि विभाग का दामन दागदार हो जाए, तो उस अधिकारी की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है। बस्तर जिले के हायर सेकंडरी स्कूल कुरंदी के प्राचार्य ने कुछ ऎसी ही मनमानी और अमनवीयता का परिचय दिया है। प्राचार्य ने स्कूल की एक महिला भृत्य को अपनी सेवनिवृत्ति के एक दिन पहले भारमुक्त कर उसे जीवन भर के लिए बड़ी पीड़ा दे दी है। आनन फानन में की गई इस कार्रवाई के पीछे बदले की भावना साफ झलक रही है। वहीं प्राचार्य को रिटायरमेंट के बाद और तीन माह का एक्सटेंशन मिल गया है, यानि वे आगे भी विभाग के दामन को दागदार करते रहेंगे।
यह दुखद घटना बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कुरंदी में कार्यरत रही भृत्य कामिनी कौशल के साथ हुई है। कामिनी कई सालों से इस स्कूल में पूरी निष्ठा के साथ सेवा देती आ रही है। प्राचार्य ने अपने रिटायरमेंट के एक दिन पहले ही आनन फानन में एक आदेश जारी कर कामिनी कौशल को स्कूल से अचानक भारमुक्त कर दिया। अपने इस तुगलकी फरमान में हायर सेकंडरी स्कूल कुरंदी के प्राचार्य ने लिखा है कि कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी जगदलपुर बस्तर द्वारा श्रीमती कामिनी कौशल भृत्य को उनकी मूल संस्था माध्यमिक शाला जामगुड़ा कुरंदी विकासखंड जगदलपुर में कार्य करने हेतु आदेशित किया गया है, अतः कामिनी कौशल को दिनांक 29 जनवरी 2026 को अपरान्ह से भारमुक्त किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि कामिनी कौशल पर प्राचार्य सफाई कार्य करने के लिए दबाव डालते रहे हैं, मगर कामिनी ने सफाई कार्य करने से इंकार कर दिया था। इसी बात की सजा के तौर पर उन्हें भारमुक्त कर दिया गया है। इस बाबत न तो विकासखंड शिक्षा अधिकारी से कोई पत्र व्यवहार किया गया, न ही उन्हें कोई जानकारी दी गई। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी करवाए गए तथाकथित आदेश में त्रुटि भी नजर आ रही है, जो संदेहास्पद है। वहीं सूत्र बताते हैं कि स्कूल में सफाई कार्य के लिए स्वीपर नियुक्त है, मगर प्राचार्य उस स्वीपर को अपने निजी कार्य में लगाए रखते हैं। एक सुशिक्षित प्राचार्य की ऎसी स्तरहीन और अमानवीय कार्यशैली से शिक्षा विभाग कलंकित हो गया है।

आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों?
एक महिला सहकर्मी के खिलाफ प्राचार्य द्वारा की गई कार्रवाई कई सवालों को जन्म दे रही है। प्राचार्य महिला कर्मी पर अन्य कार्य करने हेतु दवाब बनाते हैं।जब उक्त महिला सहकर्मी उनसे निवेदन करती है कि मुझे मेरा मूल काम करने दीजिए, तब आक्रोशित प्राचार्य आनन फानन में अपने आदेश पत्र के साथ सीधे जिला मुख्यालय जाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से त्रुटि पूर्ण आदेश उसी दिन लाकर उस महिला सहकर्मी को तुरंत अपने स्कूल से चले जाने को कह देते हैं।सुशासन सरकार में यह प्राचार्य के कुशासन और खुन्नस को दर्शाता है। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने उक्त मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन प्राचार्य अपने किए पर इतरा रहे हैं और अपने साथियों पर धौंस जमाते कह रहे हैं कि देखो ये हॉट्स है प्राचार्य का पावर। लेकिन सोचने वाली बात तो यह है कि आनन फानन में एक ही दिन में महज चंद घंटों के भीतर प्राचार्य ने कैसे अपने आदेश को वरिष्ठ अधिकारी से अनुमोदित करा कर महिला सहकर्मी को तुरंत अपने स्कूल से बाहर निकल जाने कह दिया? साय के सुशासन में एक महिला कर्मी को अपमानित करने का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? उक्त प्राचार्य को उसके रिटायरमेंट के बाद तीन माह की और सेवा वृद्धि दी गई है ताकि वो इसी प्रकार अपनी व्यक्तिगत खुन्नस किसी महिला सहकर्मी से निकलता रहें।

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