राष्ट्रीय पर्वों पर क्यों टूट गई बस्तर से जुड़ी यह परंपरा?

० मुख्यमंत्री के न आने से मायूस हैं बस्तर के लोग 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के साथ ही हर मुख्यमंत्री ने बस्तर को विकास के केंद्र में रखा और बस्तर को पूरी अहमियत दी। राष्ट्रीय पर्वों पर मुख्यमंत्री राजधानी में ध्वजारोहण न कर बस्तर के दिल जगदलपुर में उत्सव मनाने पहुंचते रहे, मगर यह परंपरा बीते कुछ वर्षों से टूट गई है। अब मुख्यमंत्री खुद न आकर अपना प्रतिनिधि भेज देते हैं। इससे बस्तर का दिल टूटने लगा है और सियासत भी होने लगी है।
मध्यप्रदेश से जुदा होकर नया राज्य बनने के साथ ही छत्तीसगढ़ में विकास का दौर शुरू हुआ। प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपने के छत्तीसगढ़ को लेकर अपने कार्यकाल में प्रधानमंत्री सड़क योजना को आगे बढ़ाया और प्रदेश में विकास कार्य शुरू किया। हर स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर बस्तर को तवज्जो देकर ध्वजारोहण में हिस्सा लिया। इसके पीछे सीधा कारण रहा- बस्तर की आवाम को आश्वस्त करना कि सरकार उनके साथ खड़ी है और लाल आतंक से बुरी तरह जख्मी हो चुके बस्तर में विकास की बयार बहाना है। अजीत जोगी जब तक मुख्यमंत्री रहे, वे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्वों पर लाल झंडे को तिरंगे की शान बस्तर में दिखाने के लिए जगदलपुर आकर ध्वजारोहण करते रहे। इस परंपरा को डॉ. रमन सिंह ने भी अपने तीनों कार्यकाल में जारी रखा। केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद मनमोहन सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सड़क योजना को जारी रखा। इस योजना ने बस्तर सहित समूचे छत्तीसगढ़ के विकास की राह को बेहद आसान बना दिया। गांव गांव में सड़कों का जाल बिछ गया और इन सड़कों से होकर विकास और जन सुविधा के दीगर कार्य भी गांवों तक पहुंचने लगे। नक्सली आतंक से रक्त रंजित बस्तर की धरा पर खुशहाली के फूल खिल उठे। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य में विष्णु देव साय की सरकार आने के बाद बस्तर की बगिया और ज्यादा महक उठी है। लाल आतंक खात्मे की कगार पर है और बस्तर के दुर्गम गांवों तक भी बुनियादी जरूरतों के तमाम सुख संसाधन पहुंच चुके हैं, बावजूद एक कमी बस्तर के लोगों को खलने लगी है। भूपेश बघेल सरकार की विदाई और बीजेपी सरकार आने के बाद सीएम बने विष्णुदेव साय ने पिछले साल तक बस्तर में ध्वज वंदन की परंपरा निभाते रहे। मगर इस साल यह परंपरा टूटती नजर आ रही है। इस बार गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री के बदले उप मुख्यमंत्री द्वारा जगदलपुर में झंडारोहण किया जाना है। इसे लेकर बस्तर में काफी चर्चा है। लोगों मायूस हैं कि अब वे सीधे मुख्यमंत्री से रूबरू नहीं हो पाएंगे।

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