56 भोग से भी बढ़कर निकले बस्तर के 36 व्यंजन

0  बड़ांजी की महिलाओं ने 36 पारंपरिक व्यंजनों के साथ जीता प्रथम स्थान 

0 ये महिलाएं अब जिला स्तर पर बिखेरेंगी बस्तरिहा जायके की खुशबू 

जगदलपुर। बस्तर की माटी की सोंधी खुशबू और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एकबार फिर चर्चा में है। पिछले दिनों धाराउर में आयोजित लोहंडीगुड़ा विकासखंड स्तरीय बस्तर पपंडुम पूरी तरह से बस्तरिया लोक-संस्कृति और पारंपरिक खान-पान के रंगों में रंगा नजर आया। इस आयोजन का आकर्षण बड़ांजी की महिलाओं का वह दल भी रहा, जिसने अपनी पाककला के अदभुत प्रदर्शन से न केवल निर्णायकों का दिल जीता, बल्कि प्रथम स्थान भी हासिल किया। इस प्रतियोगिता में बड़ांजी की महिलाओं ने बस्तर के खान-पान की विविधता को एक ही मंच पर उतार दिया। उन्होंने एक या दो नहीं बल्कि पूरे 36 प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई। उनकी थाली में सेहत और स्वाद का बेजोड़ संगम देखने को मिला, जिसमें मुख्य रूप से बस्तर की पहचान माने जाने वाले माड़िया पेज और कोदो भात शामिल थे। इसके साथ ही स्वाद को बढ़ाने के लिए बस्तर की मशहूर चापड़ा चटनी और केउ कंद से बनी केउ चटनी ने आगंतुकों को उंगलियां चाटने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा पारंपरिक आमट और पौष्टिक मुनगा भाजी जैसे व्यंजनों ने यह साबित कर दिया कि बस्तर का भोजन अपने जायके के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी खजाना है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के पीछे बड़ांजी की मातृशक्ति का कठोर परिश्रम और अपनी जड़ों के प्रति प्रेम है। टीम में शामिल कोयली मंडन, कमली बघेल, सुकरी मंडावी, चंपा कश्यप, निरबती और चंद्रकांती ने मिलकर इन 36 व्यंजनों को तैयार किया था। इन महिलाओं ने यह दिखा दिया कि आधुनिकता के दौर में भी वे अपनी रसोइयों में बस्तर की सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। विकासखंड स्तर पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने और प्रथम पुरस्कार जीतने के बाद अब इन महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। यह विजेता टीम अब जगदलपुर में आयोजित होने वाले आगामी जिला स्तरीय बस्तर पंडुम में अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरह धाराउर में इन्होंने अपने 36 व्यंजनों का जादू चलाया, वैसा ही स्वाद और बस्तरिया संस्कृति का गर्व वे जगदलपुर के मंच पर भी प्रस्तुत करेंगी।

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