0 युवाओं को हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे की तरह हैं 125 दिन काम देने का दावा, ये राम जी का नाम लेकर ग्रामीण क्षेत्रो से रोजगार छीन रहे
रायपुर। मोदी सरकार राम का नाम लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों से रोजगार का हक छीन रही है, मनरेगा कानून में परिवर्तन को मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी षडयंत्र करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने ने कहा है कि मोदी सरकार ने मनरेगा का नाम ही नहीं बदला हैं, बल्कि सोच को भी बदला है। मनरेगा ग्राम स्वराज और मेहनतकश श्रमिकों का सम्मान था, रोजगार का हक था. मोदी सरकार राम जी का नाम लेकर श्रमिकों से रोजगार का हक छीन रही है, भगवान राम जी मोदी भाजपा सरकार को माफ नहीं करेगी।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा की मोदी सरकार सबसे बड़ी संख्या में रोजगार देने वाली मनरेगा के खिलाफ पहले दिन से थी इसलिए मनरेगा के बजट राशि को 100 दिन रोजगार देने लायक नहीं दिया. 2023-24 में मनरेगा के तहत 25 करोड़ 68 लाख पंजीकृत श्रमिक थे और बजट 60 हजार करोड़ दिया गया जिसमे मात्र 8 करोड़ 32 लाख लोगो को 50 दिन से भी कम रोजगार मिला जिस पर 89 हजार करोड़ खर्च हुये. 2024-25 में पूर्व से पंजीकृत 51 लाख श्रमिकों का नाम काट दिया गया पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 25 करोड़ 17 लाख हो गईं और बजट में कोई वृद्धि नहीं किया गया एवं इस वर्ष भी 8 करोड़ 3 लाख लोगो को मात्र 37 दिन ही काम दिया गया. इस वर्ष 17 करोड़ 14 लाख लोगो को मनरेगा से रोजगार नहीं मिला. ऐसे में 125 दिन रोजगार देने का दावा युवाओं को दो करोड़ रोजगार हर साल देने, अच्छे दिन लाने, 30-35 रु. में पेट्रोल डीजल देने 15 लाख सभी के खाता में जमा कराने के खोखले दावा की तरह है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना/नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा। मनरेगा केंद्रीय कानून था, शत प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60- 40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 40 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। इस जन-विरोधी, श्रमिक-विरोधी और संघीय-विरोधी हमले का हर मंच पर, सड़क से लेकर संसद तक विरोध करेंगे।