निजी मोबाइल पर शासकीय ऐप से उपस्थिति का दबाव शिक्षकों की निजता पर हमला है – कांग्रेस

रायपुर। शिक्षकों के निजी मोबाइल पर शासकीय ऐप से उपस्थिति के दबाव को शिक्षकों की निजता पर हमला और वित्तीय जोखिम में डालने वाला तुगलकी फरमान करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार पहले तो स्कूलों में मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात करती है, फिर शिक्षकों के निजी मोबाइल पर इंटरनेट कि अनिवार्यता और शासकीय ऐप से उपस्थिति का दबाव डालती है, यह सरकार का दोहरा चरित्र है। आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी सरकार को अपने ही मातहत कर्मचारियों पर भरोसा नहीं रहा है, अव्यावहारिक निर्णय थोप कर गुरुजनों को प्रताड़ित कर रही है।

प्रत्येक विद्यालय में बायोमेट्रिक मशीन और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार शासकीय कार्यों के लिए पहले प्रत्येक स्कूल को लैपटॉप प्रदान करे, बिना वित्तीय सुरक्षा और भरोसे के थोपी गई व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है। प्रदेश में कई शिक्षक लगातार साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। फर्जी डीपीआई अधिकारी, पुलिस अधिकारी या बैंक अधिकारी बनकर कॉल करके शिक्षकों को ठगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में निजी मोबाइल पर शासकीय एप का दबाव शिक्षकों को और अधिक वित्तीय जोखिम में डालता है। शिक्षकों के उपस्थिति दर्ज करने के लिए सुरक्षित और आधिकारिक साधनों का उपयोग करना चाहिए, जिससे निजता और वित्तीय सुरक्षा बनी रहे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि शिक्षकों के साथ ही बच्चों की भी बायोमेट्रिक उपस्थिति हो, हर स्कूल में एक सफाई कर्मचारी और एक लिपिक हो, बच्चो की अनुपस्थिति के लिये अभिभावकों की भी जिम्मेदारी तय हो, शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्यो से मुक्त किया जाए, फोन के अनुचित उपयोग पर पूर्ण रूप से स्कूल में प्रतिबंध हो, बच्चो की वार्षिक परीक्षा एक अलग संस्था से कराई जाए, उस आधार पर शिक्षकों की जिम्मेदारी तय हो, सभी किताबें अनिवार्यतः एनसीईआरटी की हो, समय पर किताबें, गणवेश, साइकिल और छात्रवृत्ति का वितरण सुनिश्चित करें, सभी स्कूलों में सूर्य ऊर्जा लगाई जाए, हेडमास्टर को प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए जाए, नए सेटअप के नाम पर स्कूलों में शिक्षकों के न्यूनतम पदों की संख्या में कटौती वापस ले सरकार तभी शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार संभव है।

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