आमाबेड़ा घटना को लेकर सर्व समाज का आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

०  ईसाई मिशनरी संगठनों पर हमले, धर्मांतरण और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल 
भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हाल ही में घटित घटनाओं को लेकर जनजातीय समाज सहित सर्व समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। ईसाई मिशनरी संगठनों एवं उनसे जुड़े संगठनों के लोगों कथित भीड़ द्वारा जनजातीय समाज पर किए गए हमले, जबरन शव दफन की प्रक्रिया और पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर सर्व समाज, भानुप्रतापपुर द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम भानुप्रतापपुर को सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि आमाबेड़ा की घटना कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पूर्व भी जिले एवं प्रदेश के अन्य हिस्सों में इसी प्रकार की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे सामाजिक सौहार्द, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात हो रहा है। आरोप है कि ईसाई मिशनरी गतिविधियों के माध्यम से अवैध धर्मांतरण, सामाजिक हस्तक्षेप और स्थानीय परंपराओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ रहा है। सर्व समाज ने यह भी आरोप लगाया कि शव दफन की प्रक्रिया के दौरान प्रशासन द्वारा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया तथा शांतिपूर्ण ग्रामीणों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया।जनजातीय समाज के लोगों के विरुद्ध दर्ज मामलों, पुलिसिया कार्रवाई और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

ज्ञापन में हैं ये मांगें
ज्ञापन में राज्य में धर्म स्वतंत्रता विधेयक को प्रभावी और सख्ती के साथ लागू करने, आमाबेड़ा एवं कांकेर जिले में जनजातीय समाज पर हुए संगठित हमलों के दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने, पुलिस एवं प्रशासन के जिन अधिकारियों पर पक्षपात और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप हैं, उन्हें तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराने, जनजातीय ग्रामीणों पर दर्ज आपराधिक प्रकरणों को निरस्त कर पीड़ितों को उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग उठाई गई है। सर्व समाज ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन किसी धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि संविधान, कानून का शासन, जनजातीय आस्था और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए दिया गया है। चेतावनी दी गई कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा समय रहते दोषियों पर निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो सर्व समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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