रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं जयंती पर जारी विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए जोरदार तरीके से प्रस्तुत किया। सीएम ने कांग्रेस पर पुरानी सरकारों द्वारा तुष्टिकरण की नीति अपनाने और राष्ट्रगीत के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जो समाज अपने इतिहास से सीख नहीं लेता, उसका भविष्य बर्बाद हो जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले सभी महापुरुषों को याद किया और कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि चेतना से जुड़ने और समाज को एक सूत्र में बांधने वाला राष्ट्रगीत है।
इस अवसर पर विशेष चर्चा आयोजित करने के लिए आभार जताते हुए सीएम ने कहा कि देश की गौरवगाथा का वर्णन हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने संसद में इस विषय पर चर्चा कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। साय ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारी “वंदे मातरम्” का उद्घोष करते हुए फांसी का फंदा स्वीकार कर लेते थे।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि तत्कालीन सरकारों ने तुष्टिकरण की नीति अपनाई और कुछ वर्गों की आपत्तियों के चलते राष्ट्रगीत को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया। जन्मभूमि की प्रशंसा वाले इसके सभी अंशों को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश की आत्मा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है, जिसे किसी भी प्रकार से कमजोर नहीं किया जा सकता। यह चर्चा राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के राष्ट्रीय उत्सव का हिस्सा है, जिसमें सत्ता पक्ष ने इसे स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति और नवभारत के निर्माण से जोड़ा। पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी अपने विचार रखे थे।