
रायपुर। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) द्वारा 26 नवंबर को संविधान दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर परिषद के सदस्यों एवं विधि छात्रों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया।
एबीएपी की मध्य भारत सहसंयोजक एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि 26 नवंबर कोई साधारण दिन नहीं है, यह हर भारतीय के जीवन का आधार है। यह वह दिन है जब भारत का संविधान अस्तित्व में आया।
संघीय सचिव श्रीनिवास रथ ने बताया कि संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है और इसके ठीक दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था।
संघीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सपन देवांगन ने कहा कि संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतिबिंब है। उन्होंने बताया कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसमें 395 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 22 भाग हैं, और इसे तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश पानीग्राही ने संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया और बताया कि संविधान भारत को लोकतांत्रिक देश घोषित करता है, जो सभी नागरिकों को धर्म, जाति, लिंग और क्षेत्र के आधार पर समान अधिकार देता है।
एबीएपी के जिला अध्यक्ष अर्पित मिश्रा ने कहा कि संविधान दिवस से पूर्व इसे राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था। वर्ष 2015 से इसे संविधान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
इस अवसर पर शक्ति सिंह, तापस विश्वास, जयंत विश्वास, उमेश ठाकुर, प्रिती वानखेड़े, प्रतिमा राय, वरूणा मिश्रा, लक्ष्मी भारती, श्वेता टीकम, अदिति रावत, संजना पाणिग्रही, जयांश देवांगन सहित परिषद के कई सदस्य और विधि छात्र उपस्थित थे।