बस्तर ओलंपिक के नाम पर यह कैसा खेल? मालवाहक वाहनों से ढोए जा रहे हैं बच्चे!

0 परिवहन के फंड नहीं है, तो आयोजन आखिर क्यों 
0 व्यवस्था पर अधिकारियों के अलग अलग बोल 
(अर्जुन झा)बकावंड। पूरे बस्तर संभाग में इन दिनों बस्तर ओलंपिक की धूम मची हुई है, मगर कुछ जगहों पर यह महत्वपूर्ण आयोजन अव्यवस्था की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। बकावंड विकासखंड में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, जहां गांवों से छात्र छात्राओं को भेड़ बकरियों की तरह माल वाहक वाहनों से ढो कर लाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में बस्तर ओलंपिक अपनी अलग पहचान बना चुका है।इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है और राज्य के दूसरे संभागों में इस तरह के आयोजन की मांग उठने लगी है। बस्तर ओलंपिक का पिछला आयोजन उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा। बस्तर ओलंपिक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसमें ग्रामीण आदिवासी महिलाएं और नक्सलवाद से नाता तोड़ चुके पूर्व नक्सली भी बड़े उत्साह के साथ भाग लेने लगे हैं। राह भटके लोगों और बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी खेल प्रतिभाओं को प्लेटफार्म देने में भी बस्तर ओलंपिक बड़ा योगदान दे रहा है, मगर दुख की बात यह है कि बस्तर ओलंपिक के क्षेत्रीय आयोजनों के लिए फंड की कमी की बात सामने आने लगी है। फंड न रहने से प्रतिभागी विद्यार्थियों को आयोजन स्थल तक लाने और वापस ले जाने के लिए ढंग की परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा पा रही है। छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार ने इस महति आयोजन के लिए पूरी व्यवस्था की है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से खिलाड़ी बच्चों को मालवाहक वाहन में भर कर लाया जा रहा है। इसके चलते इस बड़े आयोजन की अब बदनामी होने लगी है। हालांकि सभी अधिकारियों का कहना है कि खिलाड़ी छात्र छात्राओं को बस, वैन जैसी बंद गाड़ियों से खेल आयोजन स्थल तक लाया जाना चाहिए, लेकिन कुछ अधिकारी फंड नहीं होने का रोना रोकर बच्चों के जान से खेलने लगे हैं। बकावंड में हो रही ब्लॉक स्तरीय खेल स्पर्धाओं के लिए गांवों से छात्र छात्राओं को माल वाहक पिकअप वाहनों में भरकर लाए जाने की तस्वीर सामने आई है। यह कृत्य बस्तर ओलंपिक की प्रतिष्ठा पर धब्बा लगाने का काम कर रहा है। इसे लेकर अधिकारियों के अलग अलग बयान सामने आए हैं।

बंद वाहनों से लाने के निर्देश
बच्चों को सुरक्षित रूप से बंद गाड़ी में ही लाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी संबधित पक्षों से कहा गया है कि प्रतिभागी छात्र छात्राओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।
-एसडीएम,
बकावंड अनुभाग

नहीं है हमारे पास फंड
बच्चों को बंद गाड़ियों से लाने और वापस ले जाने के लिए बंद गाड़ियों की व्यवस्था हेतु हमारे पास फंड नहीं है।
-परमेश्वर कुर्रे,
सीईओ जनपद पंचयत बकावंड

सुविधा अनुसार हो ला सकते हैं
बच्चों को बंद गाड़ियों से लाने ले जाने की कोई योजना हमारे पास नहीं है। जैसी भी परिवहन सुविधा हो, खिलाड़ी छात्र छात्राओं को आयोजन स्थल तक लाया जा सकता है।
-चंद्रशेखर यादव,
विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बकावंड

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