० नायकबांधा, भेलवाडीह और टोकरो गांव में फर्जी दस्तावेज़ों से करोड़ों का मुआवजा हड़पने का खुलासा – अब कलेक्टरों की भूमिका पर गिरी जांच की गाज
रायपुर। रायपुर-विशाखापट्टनम के बीच बन रहे भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए 32 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले में गिरफ्तारी पर लगी रोक हटते ही ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) ने देर रात आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी ने तीन पटवारियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अफसर कार्रवाई से पहले ही फरार हो गए।
गिरफ्तार पटवारियों में दिनेश पटेल (नायकबांधा), लेखराज देवांगन (टोकरो) और बसंती धृतलहरे (भेलवाडीह) शामिल हैं। तीनों को बुधवार को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर लिया गया।
फर्जी दस्तावेज़ों से करोड़ों का खेल
ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ है कि तीनों पटवारियों ने एक दर्जन किसानों के नाम पर 2022 में “बैक डेट” यानी 2020 से पहले के दस्तावेज तैयार किए, ताकि फर्जी मुआवजा प्रकरण तैयार कर एसडीएम से पास कराया जा सके। इन लोगों ने जमीनों को कई टुकड़ों में बांटकर नामांतरण कराया और फिर एनएचएआई से दो से तीन गुना तक अधिक मुआवजा वसूला।
केवल तीन पटवारियों की मिलीभगत से ही 10 करोड़ रुपए से अधिक की हेराफेरी की गई। गिरोह ने किसानों को “मुआवजा न मिलने” का डर दिखाकर उनसे ब्लैंक चेक और आरटीजीएस फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाए। फिर उनके नाम से आईसीआईसीआई बैंक, महासमुंद में खाते खुलवाकर रकम निजी संस्थाओं में ट्रांसफर की गई।
घोटाले का मास्टरमाइंड — हरमीत खनूजा गैंग
जांच में सामने आया कि महासमुंद निवासी प्रॉपर्टी डीलर हरमीत खनूजा, जिसकी पत्नी तहसीलदार है, ने कारोबारी विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी के साथ मिलकर पूरी साजिश रची। गैंग ने तहसील और राजस्व अमले से सांठगांठ कर पटवारियों से लेकर एसडीएम तक को शामिल किया। सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह किसानों की जमीनों के पुराने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उन्हें कई हिस्सों में बाँटता था और उसी पर नया मुआवजा प्रकरण बनवाता था।
डूबान क्षेत्र की जमीनों पर भी दोबारा मुआवजा!
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नायकबांधा जलाशय क्षेत्र की पहले से डूबान घोषित जमीनों के नाम पर भी मुआवजा प्रकरण तैयार किए गए। यानी पहले मुआवजा मिल चुकी जमीन पर लगभग 2.34 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान कराया गया। कई मामलों में एक ही जमीन पर आधा दर्जन लोगों को मुआवजा दिलाया गया — जैसे किसी जमीन का मुआवजा 30 लाख था, तो किसान को केवल 13-14 लाख मिले, बाकी रकम गिरोह ने आपस में बांट ली।
पांच अफसर फरार, अब संपत्ति कुर्की की तैयारी
ईओडब्ल्यू की टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची, तब तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, आरआई रोशनलाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर किरण और पटवारी जितेंद्र साहू अपने घरों से फरार हो चुके थे। एजेंसी अब इन सभी की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।
कलेक्टरों तक पहुंचा था ‘खेल’?
ईओडब्ल्यू ने अब इस घोटाले के सबसे ऊपरी स्तर तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। मुआवजा स्वीकृति का अंतिम अधिकार कलेक्टर के पास होता है, इसलिए एजेंसी यह पड़ताल कर रही है कि क्या एसडीएम के जरिए रकम का हिस्सा ऊपर तक पहुंचाया गया था। सूत्रों के अनुसार, चार तत्कालीन कलेक्टर जांच के दायरे में हैं।
पहले चरण में चार आरोपियों को मिली थी जमानत
इससे पहले ईओडब्ल्यू ने प्रॉपर्टी डीलर हरमीत खनूजा, कारोबारी विजय जैन, केदार तिवारी और उनकी पत्नी उमा तिवारी को गिरफ्तार किया था। बाद में अदालत ने चारों को जमानत दे दी थी।
अब ‘बड़ी मछलियों’ पर निगाह
तीन पटवारियों की गिरफ्तारी के बाद अब ईओडब्ल्यू की निगाह उन अधिकारियों पर है जिन्होंने 32 करोड़ रुपए के मुआवजा प्रकरणों पर अंतिम स्वीकृति दी थी। एजेंसी को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका का पूरा नेटवर्क उजागर हो जाएगा।