० फंड नहीं, संवेदना की कमी है — प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव
० एक ओर 5000 नई शिक्षक भर्ती की मंजूरी, दूसरी ओर आत्मानंद शिक्षकों की सेवा समाप्ति; विरोधाभास पर संघ ने उठाए गंभीर सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ ने बेमेतरा जिले से जारी उस आदेश पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है, जिसमें “फंड की कमी” का हवाला देते हुए 11 संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। संघ ने इसे “शिक्षा के मंदिर से संवेदना का निर्वासन” बताते हुए कहा कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनहीनता का प्रतीक है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने कहा कि एक ओर शासन 5000 नई शिक्षकों की भर्ती की मंजूरी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं विद्यालयों के प्रशिक्षित और अनुभवी संविदा शिक्षकों को ‘फंड की कमी’ बताकर बाहर किया जा रहा है। उन्होंने कहा यह निर्णय न केवल विरोधाभासी है, बल्कि उन शिक्षकों के आत्मसम्मान पर चोट है जिन्होंने आत्मानंद विद्यालयों की पहचान अपने श्रम और समर्पण से बनाई है। फंड की कमी नहीं, संवेदना की कमी है और अब शिक्षक समाज चुप नहीं रहेगा।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने तत्काल प्रभाव से इन शिक्षकों की सेवाएं बहाल नहीं कीं, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा।
संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष हेमांगिनी पांडेय ने कहा कि जब सरकार के पास 5000 नए शिक्षकों के लिए फंड है, तो उन्हीं विद्यालयों में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए फंड क्यों नहीं? उन्होंने कहा यह केवल जीविका का प्रश्न नहीं, बल्कि शासन की नीतिगत संवेदना की परीक्षा है। शिक्षक वह दीपक है जो स्वयं जलकर समाज को रोशन करता है, और आज शासन ने उन्हीं दीपकों को बुझाने का कार्य किया है।
संघ ने कहा कि ये वही शिक्षक हैं जिन्होंने वेतन न मिलने पर भी विद्यालयों का संचालन जारी रखा, छात्रों के बीच आशा की लौ जलाए रखी। सात महीने तक बिना वेतन के भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ा — क्योंकि उनके लिए शिक्षा केवल नौकरी नहीं, एक साधना थी। आज जब वही शिक्षक अपनी आजीविका से वंचित किए जा रहे हैं, यह न केवल अन्याय है, बल्कि शिक्षण के पवित्र धर्म का अपमान भी है।
संघ ने घोषणा की है कि पहले चरण में जिला स्तर पर “न्याय संकल्प सभा” आयोजित की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में राजधानी रायपुर में “शिक्षक सत्याग्रह रैली” के माध्यम से पूरे प्रदेश में यह आवाज़ बुलंद की जाएगी। जरूरत पड़ने पर यह मामला राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंचाया जाएगा।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल 11 शिक्षकों की बहाली का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समाज की प्रतिष्ठा का प्रश्न है। उन्होंने कहा हम न्याय चाहते हैं, संवेदना की पुनर्स्थापना चाहते हैं। आज शिक्षक समाज की आँखों में आँसू हैं, पर उन आँसुओं के पीछे अडिग संकल्प है क्योंकि शिक्षा हमारा कर्म है, और न्याय हमारा धर्म।