विनोबा एप ने बस्तर में लाई शिक्षा की नई क्रांति

0 कक्षाओं की दीवारों से निकल बच्चों के हाथों तक पहुंच गई है अब शिक्षा 

जगदलपुर। बस्तर में अब शिक्षा स्कूलों के क्लास रुम्स की दीवारों को लांघ कर बच्चों के हाथों तक पहुंच गई है। विनोबा एप ने बस्तर के शिक्षा जगत में नई क्रांति ला दी है। इस एप ने शिक्षा को सहज, सरल और सुचारु बना दिया है।
सेजस अलनार में गणित के व्याख्याता राहुल कुमार पाण्डेय कहते हैं- जीवन का एक बड़ा हिस्सा मैंने इस सोच के साथ बिताया कि हर बच्चा सीख सकता है, बस तरीका बदलने की जरूरत है, मगर कभी नहीं सोचा था कि तकनीक एक दिन इस सोच को साकार करने का सबसे सशक्त माध्यम बन जाएगी, जब तक कि मैं विनोबा एप से नहीं जुड़ा था। विनोबा एप एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक को एक साथ जोड़ता है। शिक्षक यहां अपने वीडियो, पाठ योजनाएं, शॉर्ट ट्रिक्स और शिक्षण सामग्री साझा कर सकते हैं। विद्यार्थी घर बैठे सीख सकते हैं और अभिभावक अपने बच्चों की प्रगति पर नजर रख सकते हैं। इस एप ने शिक्षा को कक्षा की दीवारों से निकालकर बच्चों के हाथों में पहुंचा दिया है। श्री पाण्डेय कहते हैं- बाहर के लोग बस्तर को एक पिछड़ा या नक्सल प्रभावित इलाका कहकर पहचानते हैं। वे सोचते हैं कि यहां केवल संघर्ष है, शिक्षा नहीं। लेकिन विनोबा ऐप ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। आज बस्तर का शिक्षक डिजिटल मंच पर देश के किसी भी हिस्से के शिक्षक से पीछे नहीं है। बच्चे जो कभी किताबों से डरते थे, अब मोबाइल पर सीख रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं, प्रश्न पूछ रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ जवाब भी दे रहे हैं।गणित के व्याख्याता अरुण कुमार पाण्डेय ने कहा- जब मैं अपने गणित के वीडियो और शॉर्ट ट्रिक्स इस ऐप पर डालता हूं, तो बच्चे उत्सुकता से उन्हें देखते हैं, अभ्यास करते हैं और कहते हैं- “सर, अब गणित मुश्किल नहीं रहा, मजेदार बन गया है सर!” यह सुनकर लगता है कि यह एप सिर्फ तकनीकी साधन नहीं, बल्कि आशा का एक आंदोलन है। इस पूरे अभियान के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा खंड शिक्षा अधिकारी शालिनी तिवारी हैं, जिन्होंने लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में शिक्षा को केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रचनात्मक यात्रा बना दिया है। उनका नेतृत्व इस विश्वास पर आधारित है कि हर शिक्षक में बदलाव लाने की शक्ति है। हमारे संकुल समन्वयक सुकरु राम बघेल ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने सभी शिक्षकों को जोड़ने का कार्य किया, मार्गदर्शन दिया, और हर विद्यालय तक यह सुनिश्चित किया कि विनोबा एप का सही उपयोग हो। उनके सतत सहयोग से शिक्षकों के बीच एक सशक्त नेटवर्क बना है जो एक-दूसरे से सीख रहा है और आगे बढ़ रहा है। इस मार्गदर्शन में हमारे प्रधानाचार्य लैखन बघेल का योगदान भी उल्लेखनीय है। उन्होंने हमें प्रेरित किया कि प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी इस डिजिटल यात्रा का हिस्सा बने और स्कूल में नवाचार के लिए हमेशा सहयोग करें। उनके अनुभव और सुझावों ने हमारी दिशा और मेहनत को और सशक्त बनाया। और इन सबके पीछे वह मज़बूत कंधा है- जिला प्रशासन का। जिला प्रशासन ने इस नवाचार को हर स्तर पर समर्थन दिया। चाहे प्रशिक्षण हो, तकनीकी सहायता हो या प्रेरणा का वातावरण तैयार करना। इस सहयोग ने हमें न केवल साधन दिए, बल्कि विश्वास भी दिया कि बस्तर अब पिछड़ा नहीं, प्रगति की प्रयोगशाला है।

जंगलों से भी आ सकता है बदलाव
व्यख्याता श्री पाण्डेय ने कहा- आज जब मैं अपने विद्यार्थियों की आंखों में उत्साह और आत्मविश्वास देखता हूं, तो लगता है कि यह वही बस्तर है जो एक समय केवल नक्सलवाद की पहचान से जाना जाता था।
अब यह वह भूमि बन गई है जहां शिक्षा के माध्यम से शांति, सृजन और सफलता की नई कहानी लिखी जा रही है। विनोबा ऐप ने हमें यह सिखाया कि परिवर्तन हमेशा किसी बड़ी राजधानी से नहीं आता। कभी-कभी वह जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे उन स्कूलों से भी उठता है, जहां एक शिक्षक और एक मोबाइल मिलकर बच्चों के भविष्य की दिशा तय कर रहे होते हैं। श्री पाण्डेय ने इस सुविधा के लिए खंड शिक्षा अधिकारी शालिनी तिवारी, संकुल समन्वयक सुकरु राम बघेल, प्रधानाचार्य लैखन बघेल, जिला प्रशासन और विनोबा टीम का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने हमें यह अवसर दिया कि हम बस्तर की इस नई कहानी के लेखक बन सकें। श्री पाण्डेय कहते हैं कि अब बस्तर केवल संघर्ष की धरती नहीं, यह वह जगह है जहां शिक्षा नई उम्मीदें लिख रही है और विनोबा एप उसका सबसे सुंदर अध्याय है।

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