कांग्रेस शासन में दूषित हुई कार्य पद्धति और परंपराएं, शासकीय संस्थाएं हुईं बर्बाद : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज अपने निवास कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में शासन व्यवस्था, कार्य पद्धतियां और प्रशासनिक परंपराएं पूरी तरह दूषित हो गई थीं। उस समय शासकीय संस्थाओं को भी बर्बाद करने का काम किया गया था।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं और अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन स्वतंत्रता से नहीं कर पाते थे, क्योंकि उस दौर में केवल भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों का वर्चस्व था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में हुए घोटाले के रूप में सामने आया है।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा जो महिला सशक्तिकरण का नारा ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ देती थीं, उनकी ही पार्टी में महिलाओं के साथ लगातार अभद्रता और अपराध की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सूरजपुर में कांग्रेस नेता द्वारा बलात्कार और हत्या, तथा रायपुर में महिला अधिकारी के साथ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा केबिन में घुसकर दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं पर कांग्रेस नेता मौन हैं।

विजय शर्मा ने कहा कि कांग्रेस शासन ने भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किए, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्तमान सरकार किसी अधिकारी को अवैधानिक कार्य के लिए प्रेरित नहीं करती। उन्होंने कहा यह अब केवल राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि हाल की घटनाएं, सरकारी दस्तावेज, आँकड़े और न्यायालयों के कथन यह साबित करते हैं कि कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार और अपराध चरम पर था।

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस के कई विधायकों और उनके करीबियों के खिलाफ घोटालों, हथियार सप्लाई, रेत खनन, हत्या और पत्रकार की हत्या जैसे गंभीर मामलों में संलिप्तता सामने आई है। उन्होंने कहा, अगर कांग्रेस यह सोचती है कि धरना-प्रदर्शन कर दबाव बनाकर कार्रवाई रोक लेगी, तो यह संभव नहीं है। विजय शर्मा ने यह भी कहा कि पूर्व सरकार ने पुलिस अधिकारियों तक को नहीं छोड़ा, उनके खिलाफ भी फर्जी प्रकरण दर्ज किए गए। हाल की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “रायपुर की एक महिला अधिकारी के चेंबर में घुसकर गाली-गलौज करना विरोध का तरीका नहीं हो सकता। हमने भी विपक्ष में रहते हुए आंदोलन किए, लेकिन कभी अपनी मर्यादा नहीं तोड़ी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, परंतु विरोध का तरीका और कारण दोनों लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होने चाहिए।

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