रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में वेतन विसंगतियों को लेकर इस समय गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए पुनरीक्षित वेतनमान में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के वेतनमान में किसी भी प्रकार के वेतन वृद्धि नहीं करने से कर्मचारियों में नाराजगी है। इस पर छत्तीसगढ़ राज्य दैनिक वेतनभोगी संघ के प्रांताध्यक्ष मिलाप यादव ने कहा कि वर्षों से समान कार्य करने के बावजूद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तुलना में न केवल कम वेतन मिलता है, बल्कि महँगाई भत्ते, चिकित्सा सुविधा, प्रोविडेंट फंड, और अन्य लाभों से भी वंचित रखा जा रहा है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब वेतन की बात आती है तो हमारे साथ भेदभाव होता है। यह हमारे साथ अन्याय है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में वर्तमान पुनरीक्षित वेतनमान में वृद्धि न होने के कारण अत्यंत नाराजगी हैं। कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाने की बात कही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी पुनरीक्षित वेतनमान में समुचित वेतन वृद्धि कर लाभ दिया जाएं। उन्होंने कहा कि वेतनमान में किसी प्रकार की वृद्धि का लाभ केवल स्थायी कर्मचारियों को ही मिलता है, जबकि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी निरंतर कार्य करने के बावजूद वित्तीय अस्थिरता और न्यूनतम आय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। अल्पवेतन से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का जीवनयापन और परिवारिक दायित्वों को निभाना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके अलावा, उन्हें सामाजिक सुरक्षा, बीमा, अवकाश, चिकित्सा सुविधा जैसी अनेक आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होतीं, जो स्थायी कर्मचारियों को प्राप्त होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के कुछ विभागों में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को श्रम सम्मान राशि नहीं दी जा रही है, जबकि श्रम सम्मान राशि सभी विभागों में नियमित रूप से दिया जाना है। वहीं कुछ विभाग में 3 -4 माह से श्रम सम्मान कि राशि नहीं मिलने से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में आक्रोश है। यह बातें छत्तीसगढ़ राज्य दैनिक वेतनभोगी संघ के प्रदेशाध्यक्ष मिलाप यादव , महामंत्री निशांत राज दुबे , कोषाध्यक्ष दीपक दशमेर ने संयुक्त रूप से कही है ।