रायपुर/जगदलपुर। बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा उत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को क्षेत्र के विकास की सबसे बड़ी बाधा करार देते हुए 31 मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का ऐलान किया। लालबाग मैदान में आयोजित भव्य समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ही बस्तर को बिजली, पानी, सड़क, शौचालय, स्वास्थ्य बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी योजनाओं से वंचित रख रहा है।
शाह ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में कुछ लोग नक्सलवाद को विकास की लड़ाई बताते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि नक्सलवाद ही विकास को रोक रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए भरोसा दिलाया कि 2026 तक बस्तर लाल आतंक से मुक्त हो जाएगा, जिससे यहां के लोगों के अधिकार और प्रगति सुनिश्चित होगी। दंतेश्वरी माई मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों के लिए विशेष प्रार्थना की।
मंत्री ने स्थानीय निवासियों से अपील की कि गुमराह नक्सलियों, जो उनके ही गांवों के हैं, को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित करें। छत्तीसगढ़ सरकार की सरेंडर पॉलिसी की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि एक महीने में 500 से अधिक नक्सली समर्पण कर चुके हैं। नक्सल-मुक्त गांवों को विकास के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता देने की योजना का भी उल्लेख किया।
बस्तर दशहरा को विश्व स्तर का सांस्कृतिक मेला बताते हुए शाह ने मुड़िया दरबार को वैश्विक धरोहर घोषित किया। उन्होंने कहा कि 1874 से चली आ रही यह परंपरा आदिवासी संस्कृति, न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों का अनमोल उदाहरण है, जिसे पूरे देश को जानना चाहिए। बस्तर संभाग के मुखियाओं से मुलाकात के बाद उन्होंने दिल्ली में इसकी चर्चा करने का वादा किया।
कार्यक्रम में शाह ने स्वदेशी जागरण मंच के प्रयासों का जयकारा लगाया और मोदी सरकार की जीएसटी में 395 वस्तुओं पर टैक्स राहत, खाद्य-पेय पर शून्य कर तथा लोकोपकारी सामान पर 5% दर का उल्लेख किया। उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों से अपील की कि स्वदेशी अपनाकर भारत को विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनाएं। उत्सव में आदिवासी ओलंपिक की शुरुआत का भी स्वागत किया गया।