पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र, बस्तर की खनिज संपदा स्थानीय लोगों के हित में सुरक्षित करें : सीपीआई

० सीपीआई बीजापुर ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

जगदलपुर। बस्तर संभाग की खनिज संपदा को स्थानीय लोगों के हित में सुरक्षित करने और उसके दोहन पर नियंत्रण की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद बीजापुर ने राजयपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि बस्तर अंचल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां जल, जंगल और जमीन जीवन और संस्कृति का आधार है। ऐसे में खनिज उत्खनन से संबंधित सभी गतिविधियों पर निर्णय लेने का अधिकार ग्राम सभाओं को दिया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय समुदाय अपनी सहमति या असहमति स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकें। पार्टी ने मांग की है कि खदानों का संचालन केवल सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से हो और किसी भी प्रकार की लीज से पहले ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य की जानी चाहिए। निजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खदानें लीज पर देने की व्यवस्था पर पूर्ण प्रतिबंध लगानी होगी। साथ ही पहले से हुए एमओयू को तत्काल निरस्त करने की भी मांग रखी गई है। सीपीआई ने आगे कहा है कि खनिज कार्य केवल स्थानीय सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जाए और इसकी निगरानी राज्य खनिज निगम करे। साथ ही खनिज सर्वेक्षण के नाम पर ग्रामीणों को प्रताड़ित करने की घटनाओं को तत्काल रोका जाए। पार्टी ने एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट और अन्य खदानों व उद्योगों के निजीकरण पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में ठेकेदारी प्रथा को तत्काल रोक लगाकर समाप्त किया जाना चाहिए।

ज्ञात हो कि बस्तर संभाग अपनी खनिज संपदा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। वर्ष 1994 में केंद्र सरकार ने सांसद दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में भूरिया समिति गठित की थी, जिसने आदिवासी समुदायों के जल, जंगल और जमीन पर अधिकार सुनिश्चित करने की सिफारिशें की थीं। लेकिन इन सिफारिशों को अब तक लागू नहीं किया गया है। सीपीआई का कहना है कि आज बस्तर की खनिज संपदा पर पूंजीपति हावी हैं बड़े कार्पोरेट घरानों की नजर है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा बल्कि इस क्षेत्र की डेमोग्राफी यानी आदिवासी समाज की संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर खतरा पैदा होगा। सीपीआई जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने रेत के मामले में पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस पालिसी एक जैसी है। जब कांग्रेस की सरकार थी तब भी खनिजों का दोहन और भ्रष्टाचार चरम पर था। आज जब भाजपा की सरकार है तब भी बेशुमार वनोपज बेशकीमती सागौन, और खनिजों का दोहन धड़ल्ले से चल रहा है जिसमें भाजपा और कांग्रेस की दोनों की संलिप्तता बराबर है। दोनों किसी से कम नही हैं। उन्होने कहा कि आने वाले दिनों में अगर ऐसे दोहन और होते रहेंगे तो सीपीई बड़े आंदोलन की तैयारी में है।

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