सरकारी नौकरी बेच कर युवाओं का भरोसा खो चुकी है सरकार : दीपक बैज

 

रायपुर। भर्ती परीक्षा में धांधली और गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह सरकार युवाओं का भरोसा पूरी तरह से खो चुकी है। एडीईओ भर्ती, वन रक्षक, पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा, आर आई प्रमोशन परीक्षा सहित विगत 20 महीनो के दौरान जितने भी प्रमोशन और भर्ती परीक्षा हुए हैं वे सभी संदेश के घेरे में हैं। किसी एक परीक्षा में 100 में से 27 प्रश्न गलत होना अर्थात लगभग एक तिहाई प्रश्न पत्र पर ही सवाल खड़ा होना सरकार और परीक्षा एजेंसी की क्षमता पर सवाल है। सहायक विकास विस्तार अधिकारी की परीक्षा में व्यापम ने खुद ही माना है कि 12 प्रश्न विलोपित किए जाए, 6 प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर मान्य किए गए और 3 प्रश्नों के उत्तर बदले फिर भी 6 प्रश्न अब तक विवादित है। सरकार की दुर्भावना के चलते भर्ती परीक्षा को मजाक बना दिया गया है ऐसे त्रुटिपूर्ण प्रश्नपत्र तैयार करने वाले जिम्मेदारों को यह सरकार बचा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि वीडियो परीक्षा में व्यापम की दुर्भावना और लापरवाही से 2 लाख 22 हजार अभ्यार्थियों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। 27 प्रश्न गलत पाए जाने पर तत्काल पूरी परीक्षा रद्द की जानी चाहिए, दोषियों को ब्लैक लिस्ट करके भविष्य में इस तरह की परीक्षाओं से परमानेंट पृथक किया जाना चाहिए और परीक्षा प्रक्रिया के लागत की रिकवरी ऐसे दोषी कर्मचारियों अधिकारियों पर की जानी चाहिए लेकिन यह सरकार उल्टे उन्हें संरक्षण दे रही हैं। सरकार के रवैया से व्यथित युवा अब भर्ती परीक्षा का भी बायकाट करने लगे हैं विगत रविवार को अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों के लिए भर्ती परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए, यह प्रमाणित करता है कि यह सरकार निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर युवाओं का भरोसा खो चुकी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि अपने चाहतों को सरकारी नौकरी बांटने और बोली लगाकर पद बेचने के लिए यह सरकार नए-नए पैंतरे आजमा रही है। आरआई प्रमोशन परीक्षा में परिजन एक साथ बैठकर पेपर लिखते पाए गए, पीएससी परीक्षा के पेपर अपात्र एल बी से जांचवाए, उनके नाम सार्वजनिक किए, वन रक्षक परीक्षा में हैदराबाद की इवेंट कंपनी को शामिल कर फर्जीवाड़ा किया गया, राजनांदगांव आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में तो पूरी गड़बड़ी का ठीकरा एक आरक्षण पर फोड़कर लीपापोती कर दी गई जिसके चलते आरक्षक अनिल रत्नाकर को जान गवानी पड़ी। हथेली पर लिखे सुसाइड नोट में बड़े अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल लीपापोती की गई। समग्र शिक्षा में 1400 पदों पर भर्ती हुई 17 तारीख की रात को अभ्यर्थियों को सूचना भेजी गई 18 तारीख को परीक्षा लिए और उसी दिन इंटरव्यू भी हो गया और 20 जुलाई को 1300 लोगों की लिस्ट जारी भी कर दी गई, बेहद स्पष्ट है कि चयनित अभ्यर्थियों की सूची लेनदेन करके पहले से ही तैयार कर लिया गया था। क्या यही मोदी की गारंटी थी? क्या यही बीजेपी का यूपीएससी पेटर्न में भर्ती परीक्षा देने का तरीका है?

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