बीजापुर। रूढ़ि जन्य परंपरागत सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष अशोक तलांडी ने हाल ही में हुई भारी वर्षा और बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर शासन-प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
तलांडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि लगातार वर्षा से बीजापुर जिले के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। नदी-नाले उफान पर आ जाने से न केवल जान-माल का नुकसान हुआ, बल्कि किसानों की फसलें बह गईं, खेतों के मेड़ कट गए और कई जगह दुपहिया-चारपहिया वाहन भी बह गए। उन्होंने कहा कि ऐसे पीड़ित परिवारों को शासन द्वारा प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा, शासकीय नौकरी, जमीन और आवास उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसानों को क्षतिपूर्ति राशि शीघ्र दी जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा के दौरान केवल स्थानीय प्रशासनिक अमला ही सक्रिय दिखाई दिया, जबकि सरकार के प्रतिनिधि अब तक मौन हैं और कोई स्थलीय या हवाई सर्वेक्षण तक नहीं किया गया है। उन्होंने इसे “सुशासन की सरकार” पर प्रश्नचिह्न बताया।
तलांडी ने यह भी कहा कि बीजापुर जिला छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर स्थित है और यहां से महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमाएं जुड़ी हैं। ऐसे में भोपालपटनम क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मार्गों पर प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों को कई दिनों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इंद्रावती और गोदावरी नदी के बेकवॉटर के कारण मार्ग बाधित हो जाते हैं, जिससे यात्रियों को ठहरने और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी समस्या आती है।
उन्होंने शासन से मांग की कि भोपालपटनम-नया रायपुरम मार्ग, भोपालपटनम-तिमेड़ नाला मार्ग सहित अन्य प्रभावित स्थानों पर यात्रियों के लिए ठहरने हेतु शेड (हाल) और सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाए, जिसका नियंत्रण प्रशासन के पास हो। तलांडी ने कहा कि इस मुद्दे पर समाज द्वारा शासन-प्रशासन को शीघ्र ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।