0 मुख्यमंत्री का जापान, कोरिया प्रवास केवल राजनैतिक पर्यटन, प्रदेश को कोई लाभ नहीं
0 नए उद्योग लगना तो दूर इस सरकार की दुर्भावना से छत्तीसगढ़ के पारंपरिक उद्योग भी बंद हो रहे
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जापान और दक्षिण कोरिया दौरे से लौटने पर प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने सवाल उठाते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री की कौन-कौन सी कंपनियों से एमओयू हुआ है, सार्वजनिक करे सरकार? छत्तीसगढ़ की जनता की गाढ़ी कमाई से मुख्यमंत्री और उनके अधिकारी जापान और साउथ अफ्रीका के दौरे पर गए थे, अब उन्हें निवेश कब-कब आयेगा इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इसके पहले भी वित्त मंत्री ओपी चौधरी अमेरिका दौरे पर गए थे, उप मुख्यमंत्री अरुण साव अमेरिका दौरे पर गए थे लेकिन नहीं बता पाए कि उनके दौरे से राज्य को क्या फायदा हुआ है? प्रधानमंत्री मोदी बार-बार लगातार अमेरिका गए, ट्रंप को अपना मित्र साबित करने में पूरी ऊर्जा और सरकारी संसाधन लुटाए गए लेकिन मिला क्या? उल्टे भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में टैरिफ और पेनल्टी लग गया। पहले डिप्टी सीएम अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के विदेश प्रवास और अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव सहित उनकी मंडली के 10 दिन लंबे विदेश दौरे से क्या हासिल हुआ है, प्रदेश की जनता को जानने का हक है।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि विदेशों से नए निवेशकों को आकर्षित करना, ठोस विदेश नीति, उद्योग नीति, श्रम कानून, वास्तविक राहत और रियायत देने वाली पॉलिसी के बिना संभव नहीं है। उद्योगों के अनुकूल वातावरण बनाने में भाजपा की सरकारें पूरी तरह नाकाम रही हैं। भाजपा के लिए उद्योगों के विकास का मतलब ही केवल अडानी का एकाधिकार है। छत्तीसगढ़ में कोल माइनिंग, आयरनओर और बॉक्साइड के बाद अब सीमेंट उद्योगों पर मोदी के मित्र अडानी की बुरी नजर है। कोल इंडिया लिमिटेड और एसईसीएल की खदानों में खनन का काम दबाव पूर्वक अडानी को सौप दिया गया है, छत्तीसगढ़ की समृद्धि और संसाधन केवल अडानी पर लुटा रही है, भाजपा के लिए उद्योग का मतलब ही अडानी है। सरकार और जनता का ध्यान भटकने के लिए जापान और दक्षिण कोरिया दौरे का प्रपंच रचा गया।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि कोई भी विदेशी उद्योगपति पहले देश में आने का मन बनाएगा, उसके बाद देश के भीतर उद्योग व्यापार के अनुकूल किस राज्य में बेहतर वातावरण है, उस आधार पर निवेश का फैसला लेगा। केंद्र सरकार खुद ही अमेरिका, चाइना, रूस और ईरान में भ्रमित है, लगातार यू-टर्न ले रही है। जापान से जितने निवेश लाने का दावा मोदी जी कर रहे हैं उसके ज्यादा तो केवल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कर रहे हैं, होड़ मची है लफ्फाजी में। भूमि, बिजली, पानी, परिवहन, यातायात की सुविधा, सरल करारोपण प्रक्रिया, सुविधा और सब्सिडी निवेशकों के आकर्षण के लिए महत्वपूर्ण कारक होते हैं। हकीकत यह है कि विगत 20 महीनों के दौरान छत्तीसगढ़ में औद्योगिक बिजली के दाम बेतहाशा बढ़ाएं गए हैं। कोयला हमारा, जमीन हमारी, पानी हमारा और हमारे ही स्थानीय उद्योगपतियों को महंगे दाम पर बिजली? आज हमारे औद्योगिक प्रतिद्वंद्वी राज्यों उड़ीसा, झारखंड और मध्य प्रदेश की तुलना में कमर्शियल बिजली के दाम डेढ़ गुना अधिक है। रोड, रास्ते मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुके हैं, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान उद्योगों के अनुकूल बनाए गए उद्योगनीति को दुर्भावना पूर्वक बदल दिया गया, भाजपा सरकार में वसूली गिरोह संचालित है, कुशासन और भ्रष्टाचार के चलते जीएसटी और आयकर विभाग भयादोहन कर रहा है, नए उद्योग लगना तो दूर इस सरकार में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक उद्योगों में भी ताला लगाने लगा है। कृषि वनोपज प्रसंस्करण उद्योग, रीपा दम तोड़ रहे, सरकारी शक्कर कारखाने और एथेनॉल प्लांट बंद होने की कगार पर हैं। स्पंज आयरन और रोलिंग मिलें लगातार बंद हो रही है। कस्टम मिलिंग की दरें घटाने से राइस मिल बंद हो रहे हैं, लोगों की नौकरियों जा रही है लेकिन भाजपा सरकार आत्ममुग्धता में नए निवेश लाने के केवल झूठे दावे कर रही है।