सड़कें ही ध्वस्त नहीं हो रहीं, प्रधानमंत्री की सोच को भी ध्वस्त कर रहे हैं ठेकेदार

0  बकावंफ ब्लॉक में पीएम ग्राम सड़क योजना की सड़कों का बेड़ागर्क 

0  सड़क निर्माण के नाम पर हुआ है जमकर भ्रष्टाचार 

(अर्जुन झा) बकावंड। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जिस उत्कृष्ट सोच के साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की है, उस सोच को योजना से जुड़े अधिकारी और ठेकेदार ध्वस्त कर रहे हैं। न सिर्फ सड़कें ध्वस्त हो रही हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सपने भी कुचले जा रहे हैं। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जितनी भी सड़कें बनाई गई हैं, उन सभी सड़कों का बेड़ागर्क हो गया है। कहीं सड़क का आधा अधूरा निर्माण किया गया है, तो कहीं डामरीकरण का कार्य ही नहीं कराया गया है। सिर्फ मिट्टी पर मुरुम डालकर उस पर रोड रोलर चलवा दिया गया है। पहली बरसात भी ये सड़कें नहीं झेल पाईं हैं। आज ये तमाम सड़कें कीचड़ और गड्ढों से लबरेज नजर आ रही हैं। ऎसी बदहाल सड़कों पर पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। सायकल, बाईक और कारें भीइन सड़कों पर नहीं चल पातीं। आपात स्थिति में गांवों तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पा रही हैं। मरीजों की जान खतरे में पड़ी रहती है। वहीं विद्यार्थियों का स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। तारापुर की सड़कों का हाल हम पहले ही बता चुके हैं। इसकी खबर प्रकाशित होने पर अधिकारियों और ठेकेदार ने मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही की है।

अब बकावंड ब्लॉक के कोलावल की सड़क की भी बदहाली की खबर आई है। यह सड़क करपावंड तालाब के पास इस कदर टूट चुकी है कि रोजाना सफर करने वाले लोग इसे सड़क को अब सड़क नहीं गड्ढों भरी पगडंडी कहने लगे हैं। बरसात का पानी गड्ढों में भर गया है और राहगीरों के लिए यह रास्ता जोखिम भरा हो गया है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि बरसात में तालाब का पानी सड़क तक पहुंच जाता है और सड़क डूब जाती है। और तब इस रास्ते पर चलना मौत को दावत देने जैसा लगता है। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चे और मरीज सबसे ज़्यादा परेशान हैं। साइकिल सवार बच्चे अक्सर कीचड़ और पानी में फिसल जाते हैं, और बीमारों को ले जाती एंबुलेंस गड्ढों में झूलते-झूलते देर तक फंसी रहती है।ग्रामीण मिल जुलकर धक्का लगाते हैं तब कहीं जाकर एंबुलेंस अपने गंतव्य की ओर बढ़ पाती है। यह सड़क न केवल कोलावल और करपावंड को, बल्कि आसपास के कई गांवों को भी जोड़ने वाली जीवनरेखा है। किसानों की फसलें मंडी तक पहुंचाने में बाधा आ रही है और आम लोगों का रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

नहीं रखा भौगोलिक स्थिति का ध्यान
यहां पर यह सवाल खड़ा होता है कि कोलावल की सड़क का निर्माण कराते समय प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के इंजीनियरों ने तकनीकी और भौगोलिक पहलुओं का ध्यान क्यों नहीं रखा? बरसात के मौसम में तालाब का पानी कहां तक विस्तारित होता है, इस तथ्य की जानकारी सरपंच एवं ग्रामीणों से क्यों नहीं ली? इससे लगता है कि सिर्फ जेब भरने के लिए सड़क निर्माण कराया गया है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क की तत्काल मरम्मत और चौड़ीकरण किया जाए। तालाब किनारे सुरक्षा प्रबंध बरसात से पहले दुरुस्त किए जाएं। सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांचकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

बरसात के बाद डामरीकरण
बरसात होने से ऐसी समस्या आई है बरसात खत्म होते ही डामरीकरण करेंगे। फौरी राहत के लिए ठेकेदार को तुरंत रिपेयरिंग कर गड्ढों को भरने कहा गया है।
-धनंजय देवांगन,
ईई, पीएम जीएसवाय, बस्तर

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