अवैध रेत भंडारण पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक; 1200 ट्रक रेत जप्त, लगाया 45 लाख का जुर्माना भी

0 कवासी लखमा के क्षेत्र में प्रशासन का बड़ा एक्शन 

0  सुकमा जिला प्रशासन के ऑपरेशन सैंड से खलबली 

(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले के जिस कोंटा इलाके में रेत के अवैध भंडारण और कारोबार ने सियासी खलबली मचा रखी थी, उस क्षेत्र में प्रशासन ने रेत माफियाओं पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक कर दिखाया है। यह वही क्षेत्र है जिसका प्रतिनिधित्व पिछले सात पंचवार्षीय कार्यकाल से कांग्रेस के विधायक कवासी लखमा करते आ रहे हैं। लखमा का खौफ ऐसा था कि अधिकारी भी रेत माफिया पर हाथ डालने से घबराते थे।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशानुसार खनिज विभाग की टीम ने कोंटा क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत भंडारण के तीन मामलों में प्रकरण दर्ज किया है। प्रभारी खनिज अधिकारी छबिलेश्वर मौर्य एवं खनिज अमला द्वारा प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई जांच में लगभग 1200 हाइवा रेत जप्त की गई। भंडारंण कर्ताओं पर 44 लाख 97 हजार 460 रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। जांच के दौरान जिन स्थलों पर अवैध भंडारण पाया गया, उनमें भंडारण करने वाले एसडी राज निवासी धरमपुरा ब्रिज नगर, जगदलपुर, बस्तर भंडारण स्थल ग्राम फंदीगुड़ा, तहसील कोंटा, जिला सुकमा, भंडारण कर्ता पी. युवराज पिता पी. विजय निवासी कोंटा भंडारण स्थल ग्राम ढोंढरा, तहसील कोंटा, जिला सुकमा तथा भंडारण कर्ता एसडी सैफ अली पिता उस्मान अली निवासी कोंटा  भंडारण स्थल नगर पंचायत कोंटा, तहसील कोंटा, जिला सुकमा शामिल हैं। जांच के समय तीनों भंडारंण कर्ताओं द्वारा वैध अभिवहन पास अथवा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 एवं छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन एवं भंडारण) नियम 2009 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। प्रभारी खनि अधिकारी श्री मौर्य ने बताया कि उक्त कार्रवाई में जप्त रेत का बाजार मूल्य लगभग 44 लाख 97 हजार रुपए है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई कलेक्टर के सख्त निर्देशों के अनुरूप की गई है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में प्रभारी खनि अधिकारी छबिलेश्वर मौर्य के साथ खनिज अमला सुकमा की पूरी टीम मौजूद रही।

पत्रकारों को जाना पड़ा था जेल
इसी रेत माफिया द्वारा उनके अवैध कार्य का भंडाफोड़ करने की कोशिश करने पर 4 पत्रकारों को गांजा के झूठे प्रकरण में फंसा दिया गया था। इन बेकसूर पत्रकारों को कई दिन और कई रातें जेल में गुजारनी पड़ी थीं। इन रेत माफियाओं ने अपने संरक्षण दाता आका से कहलवा कर कोंटा के तत्कालीन थानेदार और तेलंगाना पुलिस की मदद से चारों पत्रकारों को तेलंगाना में कथित गांजा केस में पकड़ा गया था। पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद कोंटा के तत्कालीन थानेदार ने किसी शख्स (संभवतः रेत माफिया) को फोन कर कहा था- साहब को बता देना, उनके कहे अनुसार काम हो गया है। उस समय छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारें थीं और सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र से कवासी लखमा विधायक एवं राज्य सरकार में आबकारी मंत्री थे। माना जाता रहा है कि एक साजिश और बड़े गठजोड़ के तहत पत्रकारों को फंसाया गया था। गांजा रखना गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है, लिहाजा चारों पत्रकारों को लगभग माह भर तक तेलंगाना की जेल में रहना पड़ा था। अब रेत माफिया पर हुई कार्रवाई ने साजिश से पर्दा हटा दिया है।

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