गोदाम में रखे रखे सड़ गया 32 लाख का जप्त अनाज!

0 कालाबाजारी मामले में जप्त हुआ था पीडीएस का चावल और अन्य सामान 

0 सड़ चुके चावल से उठ रही तीक्ष्ण दुर्गंध, लोग परेशान 

(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले से 32 लाख रुपए मूल्य के सरकारी चावल के सड़ जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह चावल कालाबाजारी के मामले में जप्त किया गया था और उसे कोंटा विकासखंड के चिंतलनार के गोदाम में रखा गया था। सड़ चुके चावल और अन्य खाद्यान्न से उठ रही तीक्ष्ण दुर्गंध ने लोगों का चैन से जीना हराम कर दिया है। इससे पहले खराब हो चुके जप्ती वाले 9 लाख के चावल को खाद्य विभाग द्वारा नष्ट किया जा चुका है।
मिली जानकारी के अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के 32 लाख रुपए से अधिक कीमत के चावल सहित अन्य खाद्यान सामग्री को खाद्य विभाग द्वारा डिस्पोज करने की तैयारी की जा चुकी है। कलेक्टर के आदेश का इंतजार है। मगर सवाल यह है कि गरीबों के हिस्से की लाखों रूपयों की खाद्यान्न सामग्री के खराब होने के लिए जिम्मेदार आखिर कौन है? चिंतलनार में यह दूसरी घटना है, इसके पूर्व भी 9 लाख का चावल खराब होने पर उसे डिस्पेज किया जा चुका है। खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की लापरवाही से गरीबों को दो तीन माह का चावल वितरित नहीं किया गया था। ज्ञातव्य हो कि चिंतलनार में वन विभाग एवं एक निजी गोदाम में केरलापेंदा एवं एलमपल्ली का राशन विगत तीन चाह माह से वितरण नहीं कर उक्त गोदाम में कालाबाजारी करने की नियत से रखा गया था। पिछले वर्ष जुलाई 2024 में राजधानी से खाद्य सचिव का डंडा चला तब जिला प्रशासन हरकत में आया। आनन फानन में एसडीएम कोंटा के नेतृत्व में छापामार कार्रवाई करते हुए दो गोदामों से 1200 बोरी चावल, शक्कर 47 बोरी, गुड़ 130 पेटी एवं चना 73 बोरी जप्त की गई
थी। इसका मूल्य 32 लाख से अधिक आंका गया था। इस खाद्यान्न को चावल माफिया के हवाले करने की तैयारी थी, लेकिन सारा प्लान फेल हो गया था। खाद्यान्न को जप्त कर चिंतलनार के गोदाम में रखा गया था और गोदाम को सील किया गया था। लगभग एक वर्ष का समय बीत चुका है और राशन सामग्री सड़ चुकी है। प्रशासन की उदासीनता और खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते चावल और अन्य खाद्य सामग्री खराब हो चुकी है। आखिर इस बर्बादी की भरपाई कौन करेगा? नियमों के अनुसार उक्त चावल वेयर हाऊस को हैंडओवर किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चावल व अन्य राशन की कालाबाजारी के मामले में सेल्समैन, सरपंच, सचिव सहित 6 लोगों के खिलाफ चिंतलनार थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। खाद्यान को सुरक्षित ढंग से न रखने और उसकी बर्बादी के मामले में सुकमा के जिला खाद्य अधिकारी पर अब तक कार्रवाई नहीं होना जिला प्रशासन की उन पर मेहरबानी को दर्शाता है। चावल की कालाबाजारी जिले के अधिकारी इशारे पर की जाने का मामला भी सुर्खियों में था। कालाबाजारी से प्राप्त राशि जिले से लेकर राजधानी तक पहुंचती थी। यही कारण है कि जिले के जिम्मेदार खाद्य अधिकारी पर अब तक गाज नहीं गिर पाई है। अब उक्त अधिकारी को जिले में लूप लाईन में पदस्थ कर किनारे लगा दिया गया है।

बीहड़ों में कालाबाजारी जारी
सूत्रों से जानकारी मिली है कि पीडीएस के चावल, गुड़, शक्कर, चना आदि की कालाबाजारी सुकमा जिले के पहुंच विहीन और बीहड़ इलाकों में आज भी बेखौफ जारी है। खासतौर से नियद नेल्लानार योजना के तहत चिन्हांकित गांवों के सैकड़ों कार्ड धारकों के हिस्से के एक माह के चावल की अफरा-तफरी किए जाने की खबर है। जिसमें पूवर्ती, जगरगुंडा, चिंतागुफा इलाके के गांव शामिल हैं।

डीएम के आदेश का इंतजार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चिंतलनार गोदाम में रखा चावल पूरी तरह सड़ चुका है और उससे बदबू भी उठने लगी है। इस चावल को कलेक्टर से आदेश मिलते ही डिस्पोज करने की तैयारी है। खाद्य विभाग जांच कर यह रिपोर्ट दे चुका है कि उक्त चावल एवं अन्य सामग्री उपयोग लायक नहीं है। इन्हें नष्ट किया जाना ही एकमात्र विकल्प है।

वर्सन

जल्द कराएंगेनष्ट
एक वर्ष से चिंतलनार में रखा चावल एवं अन्य खाद्य सामग्री उपयोग लायक नहीं है। उन्हें जल्द डिस्पोज कराया जाएगा।
-श्री ध्रुव,
कलेक्टर सुकमा

वर्सन
जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

सुकमा जिले के चिंतलनार में लाखों के चावल एवं अन्य खाद्य सामग्री खराब होने की सूचना मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। जिनकी लापरवाही से चावल खराब हुआ है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-रीना बाबा साहेब कंगाले,
सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, छग शासन

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