बच्चों का दर्द साझा किया कांग्रेस के प्रदेश सचिव दुर्गेश राय ने

0  बालक आश्रम के बच्चों की शिक्षा पर लगा ग्रहण 
0 शिक्षक के बिना नहीं हो पा रही है आश्रम में पढ़ाई 
जगदलपुर। बस्तर संभाग के संवेदनशील और सहृदय नेता माने जाने वाले प्रदेश कमेटी के सचिव दुर्गेश राय का मानवीय चेहरा एकबार फिर सामने आया है। दुर्गेश राय ने सुकमा जिले गुम्मा गांव में जाकर वहां बालक आश्रम में रह रहे बच्चों का दर्द साझा किया। यहां करीब डेढ़ सौ आदिवासी बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। शिक्षक न रहने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है।
कांग्रेस नेता दुर्गेश राय ने बताया कि सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड अंतर्गत संयुक्त बालक आश्रम गुम्मा के अधीक्षक के भरोसे है 148 बच्चों का भविष्य। जिम्मेदार अधिकारी इन बच्चों की सुध नहीं ले रहे हैं। कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि विभागीय अधिकारी को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, बावजूद टीचर की व्यवस्था नहीं कर पाना दुर्भाग्य जनक है। श्री राय ने सवाल उठाया है कि अधीक्षक पढ़ाएगा या आश्रम की व्यवस्था देखेगा? आश्रम के 100 बच्चे और गांव के 48 बच्चों को एक अधीक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया है। जिम्मेदार प्रशासन तंत्र को इस लचर व्यवस्था से कोई सरोकार नहीं है। युक्तियुक्तकरण को लेकर स्कूलों को मर्ज करने का काम किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार के नुमाइंदे हर चीज का पैसा हर माह ले रहे हैं, मगर ब्लाक मुख्यालय से महज 17 किलोमीटर का सफर तय कर बच्चों को हो रही परेशानी वे न सुन सकते हैं न देख सकेते है। भाजपा के नेता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल मे पढ़ा रहे है तो गरीब आदिवासी बच्चों से उन्हें कोई सरोकार नहीं रह गया लगता है।

बच्चों ने लगाई थी गुहार
बताया गया है कि अपनी परेशानी को लेकर आश्रम और गांव के बच्चों ने सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से गुहार लगाई थी। जैसे ही यह बात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं सुकमा जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दुर्गेश राय के संज्ञान में आई, कुछ घंटे में वे बच्चों क़े बीच पहुंच गए। उन्होंने बच्चों की बात गंभीरता से सुनी। जल्द ही टीचर व्यवस्था का आश्वासन भी दिया। दुर्गेश राय ने बच्चों से कहा कि बहुत जल्द आपकी समस्या जिले के कलेक्टर से लेकर शिक्षा विभाग क़े उच्च अधिकारी के सामने रखकर समस्या का निराकरण कराया जाएगा। श्री राय ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द टीचर की व्यवस्था की जाए। एक अधीक्षक पांच कक्षाओं को किस तरह पढ़ा पायेगा पहली से लेकर पांचवी तक 4 से 6 विषय हर कक्षा में पढ़ाना पड़ता है। एक सब्जेक्ट पढ़ने के लिए आधा घंटा से 45 मिनट तक का समय लगता है अधीक्षक को अन्य कार्य करना होता है। अधीक्षक पढ़ाएगा कि आश्रम के अन्य काम भी करेगा? शिक्षा विभाग ने संयुक्त बालक आश्रम गुम्मा क़े बच्चों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। दुर्गेश राय के आने की खबर सुनकर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौक़े पर पहुंचे। टीचर की कमी पर सभी लोग काफ़ी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि टीचर की व्यवस्था नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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