खूंखार नक्सली लीडर हिड़मा के नाते रिश्तेदार भी लेंगे इस ब्रिज का लाभ

0  धुर नक्सल इलाके में बीआरओ ने तैयार कर दिखाया पुल 
0 तीन घोर नक्सल प्रभावित गांवों को मुख्य मार्गो से जोड़ेगा यह ब्रिज 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। जहां कभी नक्सलियों की इजाजत के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, वहां अब पुल पुलिया और सड़कों का निर्माण हो रहा है। जिस कुख्यात और खूंखार नक्सली हिड़मा के गांव तक कच्ची सड़क जाती है, उसी हिड़मा के रिश्ते नातेदार अब सरकार द्वारा सीमा सड़क संगठन यानि बीआरओ की मदद से बनाए गए लोहे के मजबूत बैलीब्रिज से होकर आसान सफर तय कर सकेंगे। पिछले चार दशकों से पूरी तरह नक्सलियों के कब्जे में रहे सुकमा जिले के पूवर्ती इलाके में अब बदलाव की बयार बह रही है। इस इलाके में नक्सलियों की हुकुमत चलती थी लेकिन पुल बनने से अब वाहन सरपट चलेंगे। पूवर्ती गांव खूंखार और कुख्यात नक्सली हिड़मा का गृहग्राम है। केंद्र व राज्य सरकार नक्सलवाद खत्म करने के लिए जहां एक ओर सुरक्षा बलों के जरिए आक्रामक अभियान चला रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर दशकों से बुनियादी सुविधाओं के मोहताज रहे नक्सल प्रभावित गांवों में सड़क, पुल पुलिया, शाला भवन निर्माण, मोबइल फोन टॉवर स्थापना के कार्य भी तेजी से करा रही है। ताकि ग्रामीणों में नक्सलियों का भय कम हो और वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। बीआरओ (बोर्डर रोड आर्गनाइजेशन) द्वारा पूवर्ती इलाके में बैली ब्रिज बनाया गया है, ताकि बरसात के मौसम में भी वाहनों की आवाजाही होती रहे। पुल बनने के बाद ग्रामीणों की उम्मीदे जाग उठी हैं। अब गांवों तक बहुत जल्द सड़क का निर्माण भी होगा। सिलगेर और पूवर्ती गांव के बीच की दूरी करीब 8 किमी है। ये इलाका चार दशक से नक्सलियों के कब्जे में रहा है, यहां आने के लिए उनकी अनुमति लेनी होती थी लेकिन अब सुरक्षा बलों की धमक के आगे नक्सलवाद फीका पड़ रहा है। सिलगेर और पूवर्ती के बीच सुरक्षा बलों द्वारा एक कैंप टेकलगु़ड़ेम में खोला गया और कच्ची सड़क का निर्माण भी कराया गया है। लेकिन बरसात के दिनों में कुछ नालों में पानी के भराव होने से आवागमन बाधित हो रहा था। इसलिए सरकार द्वारा बीआरओ की मदद से वहां पुल बनवाया गया है। की निविदा दी। बीआरओ ने बहुत कम समय में एक बैली ब्रिज बनाया है। इस पुल के निर्माण के बाद तिम्मापुरम, टेकलगुड़ा, गोल्लाकोंडा, तुमलपाड़, जब्बागट्टा और पूवर्ती के ग्रामीणों को अवगमन में सहूलियत होगी। जहां एक और बैली ब्रिज के निर्माण से आवागमन सुगम हो रहा है वही ग्रामीणों में विकास को लेकर नई उम्मीद भी जाग गई है। दरअसल ये इलाका हिड़मा जैसे खतरनाक माओवादी इसी गांव के हैं। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकार ने पहले यहां कैप स्थापित कराया, उसके बाद धीरे-धीरे यहां विकास कार्य पहुंच रहे हैं ताकि माओवाद को छोड़ ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़े और विकास में भागीदार बने।

हिड़मा के गढ़ में 53 करोड़ की सड़क
प्राप्त जानकारी के अनुसार बैली ब्रिज सहित 64 किलोमीटर सड़क की स्वीकृति केंद्र ने 2024-25 में दी थी, इसके लिए 66 करोड़ 74 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। जहां एलमागुड़ा से दुलेड़ और पूवर्ती तक 51.25 किमी लंबी सड़़क बनेगी। इस पर लगभग 53 करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे।वहीं यह इलाका काफी नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से पुल का निर्माण नहीं हो पा रहा था। बीआरओ द्वारा सिलगेर-पूवर्ती मार्ग पर तिम्मापुरम गांव के पास लगभग 15 मीटर लंबा बैली पुल का निर्माण किया गया है। वहीं पुल निर्माण में नक्सली किसी प्रकार से बाधा ना डालें इसको ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बल के जवान सुरक्षा व्यवस्था में हर पल मौजूद थे। पुल के निर्माण होने से इलाके के एक दर्जन से अधिक गांवों में आवागमन व्यवस्था सुचारू होगी। पुल के निर्माण होने से 5000 से अधिक आबादी को लाभ मिलेगा।

लोगों में उत्साह: कोरसा सन्नू
क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य कोरसा सन्नू ने कहा है कि बैली ब्रिज निर्माण से क्षेत्र की जनता में काफी उत्साह है साथ ही उन्हे लाभ भी मिलेगा। माओवादियों के कारण ये इलाका विकास से अछूता रहा है लेकिन हिड़मा के गढ़ में मोदी और विष्णु की सरकार विकास कार्य कर रही है। मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे के संकल्प का ये एक नमूना है।

लोगों को मिली सुविधा: चौहाण
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चौहाण ने कहा है कि बीआरओ द्वारा सिलगेर और पुवर्ती के बीच बैली ब्रिज का निर्माण बहुत ही कम समय में हुआ है। इस पुल से बारिश के दिनों में कई गांवों के ग्रामीणों को फायदा मिलेगा। साथ ही उस इलाके में बहुत जल्द सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

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