0 अनुभवहीन लोग बना रहे हैं बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषाहार
0 रायगढ़ में प्लांट तो लगा दिया, नहीं दिया प्रशिक्षण
0 न्यूट्रिएंट्स और पोषक तत्वों का नहीं है ज्ञान भी
(अर्जुन झा)जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों और गर्भवती महिलाओं का कुपोषण दूर करने और उन्हें सुपोषित बनाने की योजना फेल होती नजर आ रही है। रायगढ़ के कबीर चौक अंबेडकर नगर मेंजो रेडी टू ईट प्लांट लगाया गया है, वहां में उत्पादन मानकों का पालन नहीं हो रहा है। मशीनों को ऑपरेट करने, आहार की गुणवत्ता और पौष्टिकता बनाए रखने के बारे मेंसंबंधितों को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विभाग द्वारा पोषण आहार की खरीदी महिला समूहों से की जानी है। इसी प्रक्रिया के तहत शासन एवं अफसरों के सहयोग एवं दिशा निर्देश से रेडी टू इट का प्रथम प्लांट रायगढ़ में लगाया गया है जो कि पूर्णतः मेनुअल है। रेडी टू इट खाद्य पदार्थों के उत्पादन के लिए, भारत सरकार के निर्धारित मानक और दिशा निर्देश के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए हैं। इनके अनुसार रेडी टू ईट फूड को स्वचलित मशीनों के माध्यम से ही बनाया जाता है ताकि यह मानव स्पर्श से मुक्त और संक्रमण रहित हो। फूड में निर्धारित ऊर्जा, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स कैलोरी, प्रोटीन, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, नियासिन, कैल्शियम, थायमिन, आयरन, विटामिन ए, बी12, सी और डी होते हैं और यह फोर्टिफाइन और फाइन मिक्स होना चाहिए। इनमें कार्बोहाइड्रेट 60-70 प्रतिशत, प्रोटीन 15-20 प्रतिशत, वसा 10-15 प्रतिशत तथा विभिन्न प्रकार के विटामिन और खनिजों की एक विस्तृत श्रृंखला होना जरूरी है।
किसी को कोई अनुभव नहीं
महिला समूह को पोषण आहार बनाने का कार्य तो दे दिया गया है, लेकिन समूह की महिलाओं को उत्पादन के बारे में किसी तरह का कोई अनुभव ही नहीं है। न ही जिले के अधिकारियों को यह पता है कि गुणवत्ता पूर्वक उत्पादन एवं भारत सरकार द्वारा निर्धारित पोषण आहार के मापदंड के साथ उत्पादन के लिए किस तरह की टेक्नालजी का उपयोग होगा। अभी जिस तरह यह पहला प्लांट लगा है उससे निर्धारित मापदंड अनुसार उत्पादन नहीं हो सकला एवं इस उत्पाद की लैब टेस्टिंग में ही फेल होने की संभावना है।
सेहत से खिलवाड़ तय
उत्पाद में गेहू के आटे का उपयोग होगा जिसे पर्किंग के बाद 6 माह बाद उपयोग में नहीं लाया जा सकता, फिर भी इस मैनुवल प्लांट से प्रोडक्ट का निर्माण कर वितरण होता है तो उससे निर्धारित मापदंड अनुसार कैलोरी एवं प्रोटीन की उपलब्धता न होने से महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ से खिलवाड़ होना तय है। खाद्य पदार्थ का उत्पादन करने वाली इकाइयों को हेज़ार्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट्स प्रणाली को लागू करने के लिए निर्देशित किया जाता है, जो खाद्य सुरक्षा जोखिमों को कम करने में मदद करता है। ये दिशानिर्देश, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। शासन अभी दंतेवाड़ा, बस्तर, बलौदा बाज़ार, सूरजपुर, कोरबा एवं रायगढ़ में महिलास्व सहायता समूहों के माध्यम उत्पादन कर रहा है।