15वें वित्त की राशि की हर पंचायत में मची है लूट! मद्देड़ पंचायत में पूर्व सरपंच और सचिव ने किए लाखों के वारे न्यारे 

०  अधिकारियों ने की जांच के नाम पर खानापूर्ति 
०   कलेक्टर से शिकायत के बाद भी पारदर्शी जांच नहीं 
(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के बाद अब बस्तर संभाग के बीजापुर जिले की ग्राम पंचायतों में भी 15वें वित्त की राशि की बंदरबांट, गंभीर अनियमितताओं और सरकारी फंड के दुरुपयोग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। बीजापुर जिले की ग्राम पंचायत मद्देड़ का मामला सुर्खियों में है, जहां ग्रामीणों ने पंचायत के पूर्व सरपंच सम्मैया संड्रा और सचिव कोड़े सुधाकर पर 15वें वित्त की राशि का गबन और फर्जी भुगतान के आरोप लगाए हैं और जांच प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अनियमितताओं की जांच के नाम पर लीपापोती कर दी गई है। अब पुनः जांच की मांग के लिए ग्रामीण कलेक्टर को आवेदन देने वाले हैं।
17 दिसंबर 2024 को मद्देड़ के ग्रामीणों ने कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत पेश की थी। शिकायत में बीजापुर जिले की भोपालपटनम जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मद्देड़ के सरपंच और सचिव पर पांच वर्षों में पंचायत के फंड को कई खातों में एफटीओ के माध्यम से ट्रांसफर कर लाखों रुपये का गबन करने, एक ही नाली निर्माण के नाम पर तीन बार राशि आहरित करने, जबकि कार्य पूरी तरह से अधूरा होना, सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग, रिश्वत लेकर शासकीय भूमि पर निर्माण की अनुमति देने के आरोप लगाए गए थे।

बैठक में सचिव से सवाल जवाब
19 जुलाई को मद्देड़ ग्राम पंचायत भवन में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। इस दौरान पंचायत में हुई वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर तत्कालीन पंचायत सचिव कोड़े सुधाकर को बुलाकर उनसे सवाल जवाब किया गया। सुधाकर ने बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसी आधार पर उन्हें जनपद पंचायत भोपालपटनम में अटैच कर दिया गया है।

सरपंच की जवाबदेही तय क्यों नहीं?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि का आहरण पूर्व सरपंच सम्मैया संड्रा और सचिव कोड़े सुधाकर दोनों के हस्ताक्षर से किया गया था। इसके बावजूद विभागीय कार्रवाई फिलहाल केवल सचिव को जनपद पंचायत भोपालपटनम में अटैच करने तक सीमित दिखाई देती है। न तो कथित अनियमित भुगतान की रिकवरी हुई, न ही पूर्व सरपंच के विरुद्ध किसी स्पष्ट विभागीय कार्रवाई का खुलासा हुआ है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि प्रशासन द्वारा सरपंच पर कार्रवाई की जाएगी भी या नहीं और राशि की रिकवरी कब की जाएगी?

जांच अधिकारी भी शक के घेरे में
ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों पर लीपापोती और जांच में पारदर्शी प्रक्रिया न अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जांच कब, कहां और किन बिंदुओं पर हुई? यदि जांच वाकई हुई थी तो ग्रामीणों को सूचना क्यों नहीं दी गई? अब तक न वार्ड पंचों को इसकी जानकारी दी गई और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। इससे जांच अधिकारी भी शकके दायरे में आ गए हैं।

सरपंच को अभय दान क्यों?
सरपंच और सचिव दोनों ने मिलकर पंचायत की राशि का दुरुपयोग किया, लेकिन कार्रवाई केवल सचिव पर की जा रही है। सरपंच पर न तो किसी तरह की कानूनी कार्रवाई हुई और न ही उनकी भूमिका की खुलकर जांच की गई। आखिर सरपंच को अभय दान क्यों दे दिया गया? यह सवाल गांव में अब भी तैर रहा है।ग्रामीणों ने पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बीजापुर को आवेदन देकर पूरी पारदर्शिता के साथ ग्रामीणों की मौजूदगी में जांच कराने की मांग की तैयारी में हैं। अब देखना है कि क्या बीजापुर जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा और दोषियों को सजा दिलवाएगा? सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पंचायत के फंड की रिकवरी की जाएगी?

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