० 2161 करोड़ की हेराफेरी में CSMCL बना था माध्यम
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल चार्जशीट में अनवर को पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया था।
इस शराब घोटाले में 22 आबकारी अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। ईडी की जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने घोटाले के दौरान 88 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी। इन सभी को शराब सिंडिकेट का हिस्सा बताया गया है।
ईडी ने इस मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई, 2022 को दर्ज आयकर विभाग की याचिका के आधार पर 18 नवंबर, 2022 को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। याचिका में दावा किया गया था कि छत्तीसगढ़ में शराब से जुड़ी अवैध वसूली, रिश्वतखोरी और बिचौलियों के जरिए हजारों करोड़ की हेराफेरी की गई, जिसकी कड़ी अनवर ढेबर से जुड़ती है। अनवर, रायपुर के तत्कालीन महापौर एजाज ढेबर का भाई है।
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, 2017 में आबकारी नीति में बदलाव कर छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के ज़रिए शराब बिक्री को वैधानिक किया गया, लेकिन 2019 के बाद अनवर ढेबर ने अपने प्रभाव का उपयोग कर अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का प्रबंध संचालक बनवाया और यहीं से घोटाले का ताना-बाना बुना गया।
इसके बाद अधिकारियों, शराब कारोबारियों और राजनैतिक रसूख वाले लोगों के गठजोड़ से 2,161 करोड़ रुपये का घोटाला अंजाम दिया गया। मामले की परतें खुलने के बाद ईडी ने इस वर्ष 15 जनवरी को तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी गिरफ्तार किया था।
ईडी ने 13 मार्च को इस घोटाले में रायपुर की विशेष अदालत में 3,841 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 22 व्यक्तियों और संस्थानों को आरोपी बनाया गया। इनमें पूर्व मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, पूर्व IAS अनिल टूटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलरीज़, वेलकम डिस्टलरी, ओम साईं ब्रेवेरेज, टॉप सिक्योरिटी, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट और कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया जैसे नाम शामिल हैं।