कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे द्वारा राष्ट्रपति मुर्मू के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कांग्रेस की आदिवासी विरोधी मानसिकता को दर्शाता है – किरण सिंह देव

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए आपत्तिजनक शब्दों की कड़ी निंदा की। श्री देव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए बयान, कांग्रेस के डीएनए में जमी घोर-आदिवासी विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। कांग्रेस बार-बार संविधानिक पदों और संवैधानिक संस्थानों का अपमान करती है, चाहे वह राष्ट्रपति हों, प्रधानमंत्री हों या उपराष्ट्रपति। श्री देव ने राहुल गांधी को कांग्रेस के नेताओं के बयानों का जिम्मेदार ठहराया और सवाल किया कि क्या खड़गे जी अपने बयान के लिए लिखित माफी देंगे? देश की जनता इस अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेगी और कांग्रेस को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया है। यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी के डीएनए में आदिवासी विरोधी मानसिकता गहराई से समाई हुई है। इससे पहले भी कांग्रेस ने दलित समुदाय से आने वाले पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी का अपमान किया था। कांग्रेस पार्टी में दलित विरोधी मानसिकता व्याप्त है। संविधान को हाथ में लेके चलने वाले राहुल गांधी के इशारे पर रिमोट कंट्रोल वाले अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। आज पूरा देश, हर नागरिक, आदिवासी समाज, दलित समाज और महिलाएं इस बयान की निंदा कर रहे हैं। खड़गे जी ने माननीय राष्ट्रपति के नाम को अशोभनीय तरीके से बोलते हुए कहा कि “मुरमा जी को हमने राष्ट्रपति बनाया।” उन्होंने ‘आदरणीय’ या ‘माननीय’ नहीं कहा, न ही ‘द्रौपदी मुर्मू’ कहा। इसी तरह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के नाम को अशोभनीय तरीके से संबोधित किया और कहा कि “हमने राष्ट्रपति बनाया, क्यों बनाया? हमारे लिए बनाया? हमारी संपत्ति छीनने के लिए बनाया? हमारे जंगल छीनने के लिए बनाया?” श्री देव ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे राष्ट्रपति को ‘भूमाफिया’ तक कह देते हैं। कहते हैं कि क्या उन्हें हमारी संपत्ति और जंगल छीनने के लिए बनाई गई हैं?

भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल पूछे-

क्या मल्लिकार्जुन खड़गे यह बयान राहुल गांधी के इशारे पर दे रहे हैं?

क्या ये आदिवासी विरोधी, दलित विरोधी, महिला विरोधी और संविधान विरोधी बयान राहुल गांधी के निर्देश पर हो रहे हैं? आज पूरा देश इन बयानों पर थू-थू कर रहा है।
राहुल गांधी राजनीति में इतना ज़हर क्यों घोल रहे हैं? यह किस प्रकार की विषैली राजनीति है?

क्या इससे संविधान की मर्यादा तार-तार नहीं हो रही?
यदि आप (कांग्रेस) राष्ट्रपति जी के बारे में यह कहते हैं कि उनकी सहभागिता आदिवासी समाज और दलितों की ज़मीन हड़पने के लिए है। क्या इस तरह के गंभीर आरोप किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर बिना किसी तथ्य और प्रमाण के लगाना उचित है?

क्या इस तरह की बयानबाज़ी से भारत को मज़बूत किया जाएगा?
क्या राहुल गांधी विपक्ष के नेता की भूमिका ऐसे निभाना चाहते हैं?
क्या मल्लिकार्जुन खड़गे जी अपनी इस गंभीर चूक के लिए लिखित में क्षमा याचना करेंगे?

क्या राहुल गांधी तथा कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता इस बयान की निंदा करेंगे?

क्या स्वयं कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी को इस बयान के लिए पार्टी से निकाला जाएगा?

क्या किसी पार्टी में ऐसे अध्यक्ष की जगह हो सकती है, जो देश का संविधान तार-तार करे, राष्ट्रपति जी के पद का सम्मान न करे और जनता की, विशेषकर दलित समाज और आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करे?

क्या ऐसा कोई संवैधानिक पद नहीं बचा है, जिसका अपमान कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने न किया हो?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि जब आप ‘भू-माफिया’ की बात करते हैं, तो पूरा देश जानता है कि अगर किसी परिवार पर यह तमगा चिपकता है, तो वह नकली गांधी परिवार है। वही परिवार जिसमें रॉबर्ट वाड्रा आते हैं, जो किसानों की ज़मीन हड़पने के मामलों में कुख्यात हैं। इससे पूर्व में भी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के खिलाफ़ कई बयान दिए थे। ये बयान कांग्रेस की जहरीली मानसिकता को उजागर करते हैं। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा था कि “द्रौपदी मुर्मू जैसी राष्ट्रपति किसी भी देश को न मिले। चमचागिरी की भी हद होती है। वो कहती हैं कि 70% लोग गुजरात का नमक खाते हैं। खुद कभी नमक खाकर जिंदगी जीतीं, तब शायद समझ आता।”

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठी देश की महामहिम राष्ट्रपति जी को “राष्ट्रपत्नी” कहकर संबोधित किया था। देश के अंदर उस समय राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव चल रहे थे और अधीर रंजन चौधरी की टिप्पणी थी, “हिंदुस्तान की राष्ट्रपत्नी जी सबके लिए हैं, हमारे लिए क्यों नहीं?” यह सोचने वाली बात है कि, एक कांग्रेस नेता द्वारा एक आदिवासी महिला के लिए किस तरह की अभद्र टिप्पणी की जा रही थी। बिना रीढ़ की हड्डी वाले नेता को अगर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सामने झुकना पड़े तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अगर कोई महिला मेहनत, कर्मठता, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता से आगे बढ़कर देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर पहुंच जाए, तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं को सबसे ज़्यादा ईर्ष्या होने लगती है। उनका यह मानना है कि केवल नकली गांधी परिवार के सदस्य ही संवैधानिक पदों पर होने चाहिए। भाजपा और तमाम राजनीतिक दलों द्वारा ऐसी अशोभनीय टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराने के बाद भी अधीर रंजन चौधरी पहले माफी नहीं मांग रहे थे। लेकिन 29 जुलाई 2022 को जब अधीर रंजन चौधरी ने माननीय राष्ट्रपति जी को पत्र लिखकर माफ़ी मांगी, तो उसमें लिखा था, “This is a slip of tongue.” अर्थात यह सिर्फ जुबान फिसलने की बात थी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि जब अधीर रंजन चौधरी ने माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी के लिए अनुचित शब्द का प्रयोग किया था, तब उन्होंने स्वयं राष्ट्रपति जी को पत्र लिखकर लिखित में माफी मांगी थी तो क्या अब मल्लिकार्जुन खड़गे जी भी वही नैतिक साहस दिखाएंगे? क्योंकि उनकी हालिया टिप्पणी अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत के माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , जो परिश्रम का प्रतीक हैं, जिन्होंने करोड़ों भारतीयों को परिश्रमी बनने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणा दी है, उनके विरुद्ध की गई एक अपमानजनक और तुच्छ टिप्पणी है। राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपति, दोनों ही न केवल अपने समुदायों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के प्रतीक हैं। उनका जीवन उन करोड़ों भारतीयों के लिए आशा की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बीच तप, त्याग और ईमानदारी से अपना मार्ग बनाते हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता केवल यहीं तक सीमित नहीं रही। इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कांग्रेस नेता अजय कुमार ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए कहा था कि माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ‘ईविल माइंडसेट’ अर्थात दुष्ट मानसिकता को प्रतिबिंबित करती हैं। वो दोहराते रहे, “She reflects an evil mindset.” और आज जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं राष्ट्रपति के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी करते हैं, तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि यह किसी ‘slip of tongue’ का मामला नहीं है। यह कांग्रेस पार्टी की सोची-समझी मानसिकता का प्रतिबिंब है। यह पूरी तरह से जानबूझकर किया गया है और नकली गांधी उपनाम वाले परिवार द्वारा संचालित रिमोट कंट्रोल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी के निर्देश का पालन कर रहे हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि यदि संवैधानिक पद की बात करें, तो आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी खुद ओबीसी वर्ग से आते हैं। अपनी मेहनत, लगन और नागरिकों के प्रति निष्ठा के कारण वह 11 वर्षों से देश की सेवा कर रहे हैं। लेकिन उनके लिए ‘चौकीदार चोर है’, ‘बिच्छू’, ‘सांप’, ‘नेवला’, ‘मौत का सौदागर’ जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर राष्ट्रपति पद और प्रधानमंत्री पद दोनों का अपमान किया गया। संसद सत्र के दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, देश के संवैधानिक पद पर बैठे माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनकड़ जी की मिमिक्री कर रहे थे और उनकी वीडियो स्वयं लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बना रहे थे। यह उपराष्ट्रपति पद का सीधा अपमान था। भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ कांग्रेस ने इम्पीचमेंट मोशन इसलिए लाया, क्योंकि वह सर्वोच्च न्यायालय से अपने पक्ष के फैसले की अपेक्षा रखते थे। यह बात पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री दीपक मिश्रा जी के साथ हुए व्यवहार से स्पष्ट होती है। कांग्रेस पार्टी को सीएजी, चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई किसी संस्था पर विश्वास नहीं है और हर संस्था पर आरोप लगाकर भारत के लोकतंत्र को कमजोर करना ही इनका उद्देश्य है। यह महा-ठगबंधन, जिसे इंडिया अलायंस कहा जाता है, उसमें टीएमसी के मंत्री अखिल गिरी ने राष्ट्रपति जी के लिए अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि “We don’t care about looks, but how does your President look?” जो अत्यंत निंदनीय था। क्या इस तरह की अशोभनीय टिप्पणियाँ क्या भारत की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुकूल हैं?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव ने देश की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि वह राष्ट्रपति बनेंगी, तो राष्ट्रपति भवन में बस एक मूर्ति बैठ जाएगी, जो एक शब्द भी नहीं बोलेगी। संवैधानिक मर्यादाओं को बार-बार तार-तार करने वाले यह बयान न केवल असम्मानजनक है, बल्कि यह आरजेडी की उस सोच को उजागर करता है जो एक विषैला इकोसिस्टम बन चुकी है। एक ओर लालू यादव कुर्सी पर विराजमान हैं, तो दूसरी ओर हमारे लिए भगवान तुल्य डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लालू यादव के पैरों के निकट रखी गई और अब तक इस पर न राहुल गांधी, न लालू यादव, न तेजस्वी यादव ने माफी माँगी है। समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव की तुलना डॉ. अंबेडकर से करना और उनकी तस्वीरों को एक साथ लगाना, एक हास्यास्पद और दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जो स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं, आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान करते हैं। सवाल उठता है, अगर वे स्वयं अपना सम्मान नहीं करा पा रहे, तो दलित समाज का नेतृत्व कैसे करेंगे? प्रियंका गांधी वाड्रा के नामांकन के समय कांग्रेस की मंचीय पंक्तियाँ सब कुछ कहती हैं। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पहली पंक्ति में, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे जी को दूसरी पंक्ति में बैठाए गए। यह कांग्रेस के भीतर की जातीय और सामाजिक प्राथमिकताओं की झलक है। यही कारण है कि आज खड़गे जी जिनके इशारों पर बोल रहे हैं, वही उनके आत्म-सम्मान को भी पीछे धकेल रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं के पास राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी के लिए अपमानजनक टिप्पणियों का इतिहास रहा है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के लिए कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा था कि “गूंगा, बहरा दलित भी भाजपा में किसी भी स्थिति में पहुँच सकता है” और अशोक गहलोत जी ने भी इसी तरह की टिप्पणियाँ की थीं। कांग्रेस पार्टी का लक्ष्य संविधान की हत्या करना है और दलित तथा आदिवासी समाज का अपमान करना है, लेकिन भारत की जनता यह सहन नहीं करेगी। यदि मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस पार्टी ने माफी नहीं मांगी तो देश का हर नागरिक अपने आक्रोश और व्यथा को प्रकट करेगा और यह भूल कांग्रेस पार्टी को बहुत महंगी पड़ेगी।

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