0 सीएफआरआर में वन विभाग नोडल एजेंसी नहीं
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) के तहत सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (सीएसआरएमपी) के क्रियान्वयन के संबंध में वन विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के कारण ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने वनमंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर सीएफआरआर के क्रियान्वयन के संबंध में क्षेत्रीय अधिकारियों को जारी आदेश वापस ले लिया है। विभाग ने प्रकरण की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट भी किया है।
छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों प्रकार के वन संसाधन अधिकारों की मान्यता और वितरण में सराहनीय एवं सक्रिय भूमिका निभाई है। अब तक इस अधिनियम के अंतर्गत कुल 4 लाख 78 हजार 641 व्यक्तिगत अधिकार और 4 हजार 349 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) के अंतर्गत कुल 20 लाख 6 हजार 224 हेक्टेयर वन भूमि प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य सीएफआरआर की मान्यता पत्र के वितरण के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने जनजातीय और वनवासी समुदायों को सशक्त बनाने के महत्व को समझते हुए एवं उनके अधिकारों की समय पर मान्यता सुनिश्चित करने हेतु एक सहयोगात्मक एवं समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार समस्त वन क्षेत्रों के वैज्ञानिक पद्धति से प्रबंधन की दृष्टि से संपूर्ण वनक्षेत्रों के प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना लागू होने के कारण प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ द्वारा सामुदायिक वन संसाधन के क्षेत्रों में संरक्षण एवं प्रबंधन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे कि राज्य के वनों के हित में भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय से सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना, सूक्ष्म प्रबंधन योजना प्राप्त होने के बाद ही सामुदायिक वन संसाधन के क्षेत्रों में बेहतर प्रबंधन हेतु परियोजना निर्माण किया जाकर कार्य संपादित किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय द्वारा 15 मई को जारी पत्र में मॉडल योजनाओं के आने तक केवल अनुमोदित सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना को लागू करने हेतु अंतरिम प्रक्रिया लागू करने का उपाय था। इस पत्र में टंकण त्रुटि के कारण छत्तीसगढ़ में सीएफआरआर के लिए नोडल एजेंसी वन विभाग को बताया गया था, जबकि वास्तविक पदनाम समन्वयक (फेसिलिटीटर/कोऑर्डिनेटर) होना चाहिए था जिसमें सुधार करते हुये दिनांक 23 जून को शुद्धिपत्र जारी किया गया। छत्तीसगढ़ वन विभाग सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के नियमानुसार कियान्वयन हेतु पारदर्शी सहभागिता एवं उनके सतत सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु प्रतिबद्ध रहा है और भविष्य में भी वनों के संवर्धन एवं विकास के साथ-साथ और अधिक सक्रियता से सहभागी बने रहने हेतु प्रतिबद्ध हैं।