धर्मांतरित लोगों ने मांस के लिए की गौहत्या; आदिवासी समुदाय को लड़ाने की साजिश तो नहीं?

०  बजरंग दल एक्शन मोड में, पुलिस ने 4 लोगों को किया गिरफ्तार 
०  बस्तर जिले के तोकापाल ब्लॉक की सिरिसगुड़ा पंचायत का मामला
(अर्जुन झा)जगदलपुर। बस्तर जिले में कुछ धर्मांतरित ग्रामीणों ने मांस के लिए गौहत्या कर दी। भनक लगते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता एक्शन मोड में आ गए और बजरंग दल की पहल पर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। चर्चा है कि यह कृत्य आदिवासियों में वैमनस्यता पैदा करने के लिए किया गया है।
बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड की ग्राम पंचायत सिरिसगुड़ा में गौहत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बजरंग दल की सूचना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान बुधराम मंडावी, सुखराम कश्यप, चंद्रशेखर मंडावी और मानसिंह मंडावी के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि आरोपी मतांतरित व्यक्ति हैं जो हिंदू संस्कृति और आस्थाओं के विरुद्ध कार्य कर रहे थे। बजरंग दल के विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई और पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गौ अवशेषों का अंतिम संस्कार

पशु चिकित्सा विभाग की देखरेख में गौ अवशेषों का ससम्मान अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुलिस विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और बजरंग दल के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस मामले के बाद सरकार से मांग की जा रही है कि गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाए। गौ हत्यारों को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि भविष्य में गौ माता की गरिमा का सम्मान किया जा सके और इस तरह के मामले बस्तर में दुबारा न हों। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया कि गौ हत्या के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और आरोपियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।

बड़ी साजिश की आशंका
आदिवासी गौमाता की पूजा करते हैं। आदिवासियों के आराध्य बूढ़ादेव यानि भगवान शंकर का वाहन भी नंदी है। इस लिहाजा से वे गौवंश को भी देवतुल्य मानते हैं। तोकापाल ब्लॉक में हुए गौ वध को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस घटना को निष्ठावान आदिवासियों को भड़काने और हिंदू समाज की भावना को आहत करने के लिए अंजाम दिया गया है। इसके साथ ही शांति की ओर तेजी से बढ़ रहे बस्तर में अशांति का जहर घोलने का प्रयास भी इस कृत्य के जरिए किया गया है।

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