रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस को मनाया गया शौर्य दिवस के रूप में

० महारानी के चित्र की नहीं उनके चरित्र की पूजा हो: सांसद महेश कश्यप 
जगदलपुर। आदिवासी ध्रुव गोंड समाज का जिला स्तरीय वार्षिक कार्यक्रम मुरिया भवन में आयोजित किया गया। गोंडवाना की रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस को शौर्य दिवस के रूप में बड़े धूमधाम मनाया गया। कलश स्थापना के साथ ही सैकड़ों की संख्या में सामाजिक महिला पुरुष रानी दुर्गावती के शहादत दिवस पर शक्ति प्रदर्शन करने एकत्रित हुए। मुख्य अतिथिबस्तर के सांसद महेश कश्यप, अध्यक्ष केंद्रीय गोंड महासभा धमधा एमडी ठाकुर, सामूराम मौर्य अध्यक्ष मुरिया समाज, दशरथ नेताम अध्यक्ष भतरा समाज ने रानीदुर्गा वती के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर आदी शक्ति बूढ़ा देव की पूजा अर्चना की और कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
अतिथियों के स्वागत में नौनिहालों द्वारा रानी दुर्गावती का वेश धारण कर संस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने रानी दुर्गावती की कार्य कुशलता पर प्रकाश डालते हुएं कहा कि रानी दुर्गावती को अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए कई बार दुश्मन राजाओं से युद्ध करना पड़ा। अंत में मुगल के साथ युद्ध करते हुए वीर गति को प्राप्त हुई। मुख्य अतिथि सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में रानी की वीर गाथा को स्मरण करते हुए कहा कि तैल चित्र की नहीं उनके चरित्र की पूजा हो। ध्रुव समाज के द्वारा दिए गए ज्ञापन में भूमि आबंटन की मांग के संबंध में सांसद श्री कश्यप ने कहा कि समाज को भूमि अवश्य मिलेगी। अधिकारियों से चर्चा कर इसके लिए प्रयास करूंगा।इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। दसवीं बारहवीं में पास हुए मेधावी छात्र छात्राओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर गोपाल नाग, सामूराम मौर्य अध्यक्ष मुरिया समाज, दशरथ नेताम अध्यक्ष भतरा समाज, संभागीय संरक्षक एसएस चंद्रवंशी, संभागीय अध्यक्ष संजय ध्रुव, संभागीय अध्यक्ष गोमती ध्रुव, जिला अध्यक्ष शंभूनाथ ध्रुव, संभागीय सचिव लीलेश्वर ध्रुव, दयावती ध्रुव, जयसिंह ध्रुव, लखापुरी कोंडागांव से कांतू राम ध्रुव, बीजूराम, गीदम से पधारे पवन कुमार ध्रुव, विक्रम चंद्रवंशी, ओमप्रकाश ध्रुव, अशोक मंडावी, करण सिंह ध्रुव, गौरी ध्रुव, राधाबाई ध्रुव, हेमंत चंद्रवंशी, राधेश्याम ध्रुव, मीडिया प्रभारी रामनारायण ध्रुव, रूपनारायण ध्रुव, सीताराम ध्रुव सहित बड़ी संख्या मे समाज के लोग उपस्थित थे।

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