काली पट्टी बांधकर प्रदेश के शिक्षक स्कूलों में कर रहे हैं प्रदर्शन

0 युक्तियुक्तकरण की आड़ में की गई 2008 के सेटअप से छेड़छाड़, शिक्षकों ने किया विरोध 

जगदलपुर। युक्तियुक्तकरण की आड़ में सेटअप 2008 के साथ छेड़छाड़ के विरोध में शिक्षकों ने स्कूलों में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन शुरू किया है। स्कूल खुलते ही पहले दिन से ही शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन 30 जून तक चलेगा।
शिक्षक युक्तियुक्तकरण को रद्द करने, एरियर्स सहित क्रमोन्नत वेतनमान देने, प्रथम सेवा गणना कर पुरानी पेंशन का लाभ एवं पदोन्नति में बीएड की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ के प्रदेश संचालक शंकर साहू ने कहा है कि प्रदेश संचालक व अन्य 22 प्रदेश संचालकों के मार्गदर्शन में स्कूल खुलने के पहले ही दिन से मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी जिला सहित प्रदेश के शिक्षकों द्वारा अपने-अपने स्कूलों में ही काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रांतीय उप संचालक भूपेंद्र साहू, तेजराम कामाड़िया, जिला संचालक-मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी राजकुमार सरजारे, जशपुर जिला संचालक महेश यादव, मुंगेली जिला संचालक राजकुमार धृतलहरे, कोंडागांव जिला संचालक- सुरेश कुमार बेर, दुर्ग जिला संचालक कीर्तिमान कामड़े ने बताया कि शिक्षक साझा मंच का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदेश संचालक-मनीष मिश्रा, केदार जैन, वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा, विकास राजपूत, कृष्ण कुमार नवरंग, राजनारायण द्विवेदी, जाकेश साहू, भूपेंद्र सिंह बनाफर,भूपेंद्र गिलहरे, चेतन बघेल, गिरीश केशकर, लैलून भारद्वाज, प्रदीप पांडे, प्रदीपलहरे, राज किशोर तिवारी, कमल दास मूरचूले, प्रीतम कोशले, विक्रम राय, विष्णु प्रसाद साहू, धरमदास बंजारे एवं अनिल कुमार टोप्पो ने कहा कि 30 जून तक ग्रामीणों, पंच, सरपंचों गण, जनपद सदस्यों जिला पंचायत सदस्यों, पालक समिति एवं विद्यालय प्रबंधन समिति को सभी शिक्षकों द्वारा राज्य सरकार की शिक्षा और शिक्षक विरोधी कार्यो के बारे में बताया जा रहा है।शिक्षा गुणवत्ता पर विपरीत असर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सभी प्राथमिक, मिडिल, हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में एक-एक शिक्षकों की संख्या कम की गई है। प्रधान पाठक के पदों को समाप्त किया जा रहा है, स्कूलों को मर्ज करने से प्रधान पाठक के पद समाप्त हो गए हैं, स्कूलों में शिक्षकों के पदों की कमी करने से शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित होगी, प्राथमिक शाला में मात्र दो शिक्षक रह गए हैं, इस प्रकार मिडिल स्कूल में तीन से चार शिक्षक ही रहेंगे इससे शिक्षा गुणवत्ता में भी व्यापक असर पड़ सकता है।

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