रायपुर पश्चिम में 289 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमि पूजन सम्पन्न, करबला तालाब के नामकरण पर गरमाया माहौल – मूणत बोले, मरीन ड्राइव जैसा बनेगा यह स्थल

रायपुर। रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 38 स्वामी आत्मानंद में आज 289 लाख रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का भूमि पूजन भव्य आयोजन के साथ सम्पन्न हुआ। इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेश मूणत, महापौर मीनल छगन चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौर, निगम आयुक्त विश्वदीप (IAS) और कई जनप्रतिनिधि तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान करबला तालाब का नाम बदलकर स्वामी आत्मानंद के नाम पर करने की मांग जोरों पर रही। श्री मूणत ने कहा कि “करबला तालाब शहर के बीचोंबीच स्थित एक ऐतिहासिक जलस्रोत है जिसे अब मरीन ड्राइव की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां मॉर्निंग वॉक पाथवे, योग भवन, ओपन जिम, बच्चों के लिए खेल परिसर और सुरक्षा व्यवस्था की समुचित योजना तैयार की गई है।” उन्होंने कहा कि तालाब का आधा हिस्सा अतिक्रमण मुक्त हो चुका है, शेष कब्जे को भी जल्द हटाया जाएगा।

श्री मूणत ने यह भी कहा कि जनता की मांग पर जीई रोड स्थित शराब दुकान को हटा दिया गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार है। क्षेत्र की जनता की सुविधाओं के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा, चाहे वह कितना ही कठिन क्यों न हो।

महापौर मीनल छगन चौबे ने कहा कि नगर निगम रायपुर शहर की बुनियादी संरचना, स्वच्छता, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सहयोग की सराहना की।

सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि नगर निगम ने हर वार्ड में ठोस विकास योजना तैयार की है और जनता को आने वाले समय में और भी सुविधाएं मिलेंगी। निगम आयुक्त ने जानकारी दी कि इन 289 लाख की लागत से मायाराम सुरजन शाला में आधारभूत अधोसंरचना और करबला तालाब के आसपास भवन निर्माण समेत अन्य कार्य होंगे।

इस अवसर पर दीपक जायसवाल, श्वेता विश्वकर्मा, आनंद अग्रवाल, सहित दर्जनों पार्षद, मंडल पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार (केंद्र, राज्य और नगर निगम) को क्षेत्र के समग्र विकास के लिए धन्यवाद दिया।

स्वामी आत्मानंद – सेवा, शिक्षा और समर्पण की प्रतिमूर्ति

स्वामी आत्मानंद (1929–1989) रामकृष्ण मिशन के महान संत, समाजसेवी और शिक्षाविद थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा का दीप जलाया। नारायणपुर आश्रम और अबुझमाड़ प्रकल्प जैसी पहल कर उन्होंने आदिवासी समाज के जीवन को नई दिशा दी। रायपुर के विवेकानंद आश्रम की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका जीवन सेवा, संयम और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है।

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