आदिवासी छात्राओं की पढ़ाई खतरे में, नहीं मिल रही है शिष्यवृत्ति

बकावंड। 250 सीटर कन्या छात्रावास बकावंड में रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलना बंद हो गई है। इससे उनकी पढ़ाई खतरे में पड़ गई है। पालकों ने कलेक्टर को आवेदन देकर छात्रवृत्ति दिलाने की मांग की है।
कलेक्टर को आवेदन देने पहुंचे पालकों ने बताया कि वे गरीब तबके हैं और रोजी मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। इसीलिए उन्होंने अपनी बेटियों को छात्रावास में रखकर पढ़ाने का फैसला किया था। छात्राओं को शिष्यवृत्ति देना बंद कर दिया गया है। नतीजतन छात्रावास में उनके भोजन, साबुन सोडा, तेल व दैनिक जरूरत की अन्य चीजों की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। पालक इस संबंध में वे सांसद महेश कश्यप, आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त समेत कई अधिकारियों को अपनी पीड़ा बता चुके हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। हालत यह है कि पालक अब अपनी बेटियों को छात्रावास से निकाल कर घर ले जाने और उनसे रोजी मजदूरी कराने की सोचने के लिए मजबूर हो गए हैं। इन आदिवासी पालकों ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि शिष्यवृत्ति भुगतान की जल्द पहल करें।

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